108 उपनिषद Pdf | 108 Upanishads Pdf Hindi

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108 Upanishads Pdf Hindi

 

 

 

 

 

 

 

वेद के अनुसार वेद की प्रत्येक शाखा का एक उपनिषद होता है। इस प्रकार वेद की जितनी भी शाखाये है उतने ही उपनिषद होना चाहिए। उपनिषद का साधारण अर्थ होता है ‘समीप बैठा’ या ‘समीप उपवेशन’ चार वेद है तथा एक वेद के चार भाग किए गए है। उन्हें मंत्र संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक तथा उपनिषद कहते है।

 

 

 

भारत के इतिहास में मुगल तथा अंग्रेजो की वजह से वेदो की कई शाखाये विलुप्त हो गयी है परन्तु मुक्तिकोपनिषद में वेद और उनकी शाखाओ का वर्णन कुछ इस प्रकार से प्राप्त होता है। वेद की संख्या चार बताई गयी है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।

 

 

 

ऋग्वेद की (21) इक्कीस शाखाये है। यजुर्वेद की (109) एक सौ नौ शाखाये है। सामवेद के सहस्र (1000) शाखाओ का प्रसार हुआ है। अथर्ववेद के पचास (50) भेद प्राप्त होते है। एक-एक शाखा की एक-एक उपनिषद प्राप्त होती है। अतः मुक्तिकोपनिषद में बताये गए वेद की शाखाओ के अनुसार 1180 उपनिषद होते है।

 

 

 

परन्तु उसके अलावा और भी उपनिषद प्राप्त होते है। मुक्तिकोपनिषद में मुख्य रूप से 108 उपनिषदों के नाम का उल्लेख प्राप्त होता है और वर्तमान समय में 11 मुख्य उपनिषद की संख्या प्राप्त है। मुक्तिकोपनिषद 1.14 के अनुसार एक-एक शाखा का एक-एक उपनिषद होता है।

 

 

 

ऋग्वेद 21 शाखाये, यजुर्वेद की 109 शाखाये, सामवेद की 1000 शाखाये, अथर्ववेद की 50 शाखाये के योग से कुल 1180 शाखाये होती है। परन्तु आज मूलरूप से ग्रंथो की 12 शाखाये ही प्राप्त होती है। 1180 शाखाओ के पश्चात मंत्र भाग और ब्राह्मण भाग के भेद से एक उपनिषद के कई उपनिषद बन जाते है।

 

 

 

मुगलो तथा अंग्रेजो ने जब भारत वर्ष पर आक्रमण किया तो उन्होंने कई पुस्तकालयों को जला दिया जिसमे कई बहुमूल्य ग्रंथो के साथ पूर्व तापीय तथा उत्तर तापीय उपनिषद विलुप्त हो गए। बनारस (वाराणसी) के पुस्तकालय को मुगलों तथा अंग्रेजो ने 6 महीने नष्ट करते रहे।

 

 

 

उनमे कई भारतीय वेद, रसायन शास्त्र, योग, खगोलीय शास्त्र, आयुर्वेद शास्त्र की कई अनमोल पुस्तके नष्ट हो गयी। कई विद्वान ब्राह्मणो ने योग बचाने में भगवान की मूर्ति को तोड़कर उसके फर्श के नीचे छुपाकर वेद और शास्त्रों को बचाने का प्रयास किया ताकी जब आक्रमणकारी आवे तब टूटी हुई मूर्ति देखकर यह सोचे कि यहां तो पहले ही आक्रमण किया जा चुका है वह फिर वापस चले जाए।

 

 

 

 

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108 Upanishads Pdf

 

 

 

 

 

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