Apsara Sadhana Book Pdf / अप्सरा साधना बुक

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

महात्मा पुनीत ने ध्यान मग्न होकर देख लिया कि उनके गुरु भाई सुनीत ने मिलन को उनके पास आने की सलाह दिया है। महात्मा पुनीत मिलन की विगत बातो को भी ज्ञात कर लिया। महात्मा पुनीत ने मिलन से कहा – वत्स! यह कार्य बहुत कठिन है मैं इसे पूर्ण करने में समर्थ नहीं हूँ लेकिन इस कार्य को पूर्ण करने में तुम्हारी सहायता अवश्य कर सकता हूँ।

 

 

 

 

महात्मा पुनीत बोले – मिलन! यहां से आठ योजन दूर उत्तर एक घनघोर जंगल है। वह सोलह योजन में फैला हुआ है। उस जंगल के मध्य में एक बहुत बड़ी झील है। उस झील के अंदर एक निर्जन स्थान पर हमारे गुरु जी महाराज प्रबोधनंद जी साधना करते है वह एक वर्ष तक सोते है और एक वर्ष जागते है।

 

 

 

 

उसी जागृत अवस्था में अपनी साधना को पूर्ण करते है। वह अपनी साधना के बल से ही तुम्हे सभी परियो से मिला सकते है और तुम्हे परीलोक जाने के लिए युक्ति भी बता सकते है। मिलन बोला – महात्मा जी! लेकिन मैं उनके पास तक कैसे पहुँच सकता हूँ?

 

 

 

 

महात्मा बोले – मिलन! वहां तक पहुँचने के लिए मैं तुम्हे साधन बताऊंगा। महात्मा ने मिलन को एक दिव्य स्वर्ण से बनी हुई अंगूठी प्रदान करते हुए कहा – यह अंगूठी दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में पहन लो इसके पहनते ही तुम हवा में उड़ने की शक्ति से पूर्ण हो जाओगे तथा पानी के ऊपर भी चल सकोगे।

 

 

 

 

पानी में रहने वाले जलचर जीव तुम्हे कोई हानि नहीं पहुंचा सकते है। हवा में उड़ते समय नभचर जन्तुओ से यह अंगूठी तुम्हे सुरक्षा प्रदान करेगी। प्रबोधनंद महाराज के पास जाते समय तुम्हे अनेक प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ेगा लेकिन तुम्हारी यात्रा निर्विघ्न सम्पन्न हो जाएगी।

 

 

 

 

तुम प्रबोधनंद महाराज के पास सकुशल पहुँच जाओगे। मिलन वह दिव्य स्वर्ण अंगूठी अपने दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण कर लिया फिर महाराज के पास जाने के लिए महात्मा पुनीत से आज्ञा मांगी। महात्मा ने उसे आशीर्वाद दिया और मंगल कामना के साथ विदा किया।

 

 

 

 

मिलन महात्मा पुनीत से आज्ञा लेकर उत्तर दिशा की तरफ चल पड़ा। उसे भूख और प्यास दोनों सताने लगी। सामने एक बहुत बड़ा पर्वत दिख रहा था। वह स्वर्ण की तरह चमक रहा था। मिलन भूख प्यास से व्याकुल होकर एक वटवृक्ष की छाया में जाकर बैठ गया।

 

 

 

 

उसने सुनीत महात्मा द्वारा प्रदान की गयी चंदन की लकड़ी के टुकड़ा से अपने लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने के लिए कहा – कुछ समय के उपरांत दो नवयुवक भोजन पानी के साथ फल ले आकर मिलन के सामने रख दिए उसके बाद वह दोनों नवयुवक कही गायब हो गए।

 

 

 

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