Ashirwad Pandit Novel in Hindi Pdf / आशीर्वाद पंडित नॉवेल Pdf

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

दीपक सीधे पंकज स्वीट हॉउस के मालिक राजेश के पास गया और उनसे बीस किलो पेठा मांगने लगा तथा एक हाथगाड़ी भी किराये पर वही से लिया। राजेश ने बीस किलो पेठा का 1200 रुपये बताया और रोज गाड़ी का किराया बीस रुपये।

 

 

 

 

दीपक राजेश को हाथगाड़ी का एक महीने का किराया और पेठा का 1200 एक साथ 1800 रुपया देते हुए बोला राजेश भाई अगर कभी आपको रुपया नहीं मिल पाया तो आप धंधे के लिए पेठा उधार दे सकते है क्या? राजेश बोला – तुम यहां काम करने वाले पुराने आदमी हो इसलिए तुम्हे हमारा सहयोग रहेगा।

 

 

 

 

इस दुनियां में किसी का सहयोग करना अपना नुकसान करने के बराबर है। राजेश ने कटु सत्य बयान किया था। दीपक हाथगाड़ी पर पेठा लादकर फेरी करने के लिए चला गया। किस्मत भी मेहनत वालो का ही साथ देती है। दीपक को धंधा करने का अनुभव भी था। वह शाम तक राजेश के पास आ गया।

 

 

 

 

दूसरे दिन उसने चालीस किलो पेठा लिया इस तरह से उसका व्यवसाय खूब चलने लगा और वह अपने व्यापार से संतुष्ट था।स्कूल खुल गए थे। सुधीर और रजनी पढ़ने जाने लगे थे तथा अन्य छात्र भी पढ़ाई के लिए स्कूल आ रहे थे।

 

 

 

 

अब सुधीर पहले से थोड़ा गंभीर हो गया था। उसके अंदर स्कूल में ही नहीं तालुका और जिला में भी प्रथम आने की अभिलाषा बहुत ही तीव्र हो गयी थी।

 

 

 

 

यह बात उसने रजनी से कह दिया था रजनी भी पढ़ने में खूब मेहनत करने लगी। इस समय सुधीर कक्षा 8 का विद्यार्थी और रजनी कक्षा 9 में पढ़ती थी। पढ़ाई के साथ ही रजनी अपने पिता के कार्य में भी सहयोग करती थी। एक दिन सुधीर अपने घर बैठकर पढ़ाई कर रहा था तभी नरेश रजनी के साथ उसके घर आ गया।

 

 

 

 

नरेश को पढ़ाई के विषय में विवेक से कुछ बात करनी थी। सामने सुधीर को देखकर उसकी नाराजगी दूर करने का अच्छा मौका था। सुधीर रजनी से बोला – दीदी जाकर घर में से नरेश भैया के लिए चाय पानी लेकर आओ। रजनी बोली तू ऐसे कह रहा है जैसे यह मेरा ही घर हो।

 

 

 

 

अगर आपका घर मेरा हो सकता है तो हमारा घर आपका क्यों नहीं हो सकता है दीदी? बहुत दिनों के बाद ही सुधीर आज इतना बेफिक्र होकर बात कर रहा था। तभी रजनी कंचन से कहकर पानी और बिस्किट लेकर आयी। नरेश पानी पीते हुए बोला सुधीर तुम हमसे नाराज हो क्या?

 

 

 

 

नहीं तो लेकिन किसने आपसे कहा कि मैं नाराज हूँ। एक दिन विवेक हमसे मिला था तो उसने ही बताया कि सुधीर तुमसे नाराज है लेकिन नरेश भैया आपने तो सच्चाई कहा था क्योंकि मैं कभी अपनी कक्षा में प्रथम नहीं आ सका था और मैं आपकी उसी बात से प्रेरणा लेकर अब से कोशिस में लग गया हूँ।

 

 

 

 

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