सम्पूर्ण चरक संहिता Pdf | Charaka Samhita Pdf In Hindi

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चरक संहिता के अनुसार व्यक्ति अपनी सेहत तथा बीमारी के लिए स्वयं ही जिम्मेदार होता। बीमारी तथा सेहत का निर्धारण पहले से नहीं होता है। बल्कि व्यक्ति अपने जीवन पद्धति के स्वास्थ्य तथा रोग का निर्धारण करता है। अगर कोई व्यक्ति थोड़ा सा प्रयास करे तथा अपनी जीवन पद्धति को अनुशासित तथा संयमित रखकर अच्छी सेहत प्राप्त कर सकता है।

 

 

 

 

भारत में महर्षि चरक आयुर्वेद के विशारद में के रूप में प्रख्यात है। आयुर्वेद की बात करने पर महर्षि चरक नाम न आये ऐसा कदापि संभव नहीं है। महर्षि चरक कुषाण राज्य के राज्य वैद्य थे। उन्होंमे रोग नाशक और रोग की रोकथाम के लिए एक ग्रंथ की रचना किया था जो चरक संहिता के नाम से सुविख्यात है। इस चरक संहिता में रोग के प्रतिरोधक के लिए सोना, चांदी, लौह तथा पारा जैसी धातुओं के भस्म का उपयोग करने के लिए बताया गया है।

 

 

 

 

महान ऋषि चरक के जन्म मे निश्चित तथ्यों का उल्लेख नहीं प्राप्त होता है। मान्यताओं के अनुसार 2300 से 2400 वर्ष पहले उनका जन्म हुआ था। महर्षि चरक को चिकित्सा जगत का जनक कहा जाता है। महर्षि चरक की जीवनी से हमे यह पता चलता है कि प्राचीन भारत में भी विज्ञान पद्धति और इससे जुड़े चिकित्सा के तौर तरीके कितने आधुनिकता को प्राप्त थे।

 

 

 

Charaka Samhita pdf in Hindi

 

 

 

 

 Charaka Samhita Pdf

 

 

 

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Pdf Books Name Charaka Samhita Pdf
लेखक ब्रह्मानन्द त्रिपाठी
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 356
Pdf साइज़ 14.8 MB
Category आयुर्वेद

 

 

 

 

 

 

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आयुर्वेद और चरक संहिता को समझने के लिए सबसे पहले महर्षि चरक के विचारो को समझना बहुत आवश्यक है। चरक संहिता के अनुसार मरीज का इलाज करने में कोई डाक्टर तक कदापि सफल नहीं हो सकता जब तक उसे मरीज के अभी अंगो की पूर्ण जानकारी नहीं हो जाती है। एक डाक्टर के लिए शरीरिक विज्ञान और शरीर के अंगो की भली भांति जानकारी रखना आवश्यक होता है।

 

 

 

इलाज करने के नियम

 

 

 

महर्षि चरक के अनुसार डाक्टर अथवा वैद्य के लिए वातावरण के साथ ही शरीर से जुड़े सभी अवयव को समझना बहुत जरूरी होता है जिससे मरीज का इलाज करने में सहूलियत मिलती है क्योंकि मरीज और उसकी बीमारी पर वातावरण का बहुत प्रभाव रहता है।

 

 

 

महर्षि चरक के अनुसार डाक्टर को अपने चिकित्सा ज्ञान और अनुभव के बल पर मरीज के सभी अंगो की समुचित जानकारी होनी चाहिए और यही समुचित जानकारी मरीज का इलाज करने में डाक्टर को सहायता प्रदान करती है। महर्षि चरक के अनुसार किसी बीमारी का इलाज करने से बेहतर है कि बीमारी को होने से रोक दिया जाय। चरक संहिता में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि जब तक डाक्टर को जब तक वातावरण तथा मरीज के शारीरिक जानकारी नहीं होगी तब तक इलाज करने में सफल होना संभव नहीं है।

 

 

 

अच्छी सेहत का आधार संतुलित जीवन

 

 

 

महर्षि चरक के अनुसार मनुष्य स्वतः ही अपनी जीवन पद्धति से बीमारियों का निर्धारण करता है क्योंकि मनुष्य की सेहत और बीमारी पहले से तय नहीं रहती है। संयमित और संतुलित जीवन पद्धति निरोगित जीवन तथा अच्छी सेहत का आधार होता है।

 

 

 

अगर मनुष्य का जीवन अस्त-व्यस्त है तथा असंतुलित है तो मनुष्य के शरीर में बीमारी आने से कोई नहीं रोक सकता है तथा बीमारियों के लिए मनुष्य के शरीर में घर बनाना बहुत आसान हो जाता है। अतः चरक संहिता में जीवन पद्धति को व्यवस्थित करने पर बहुत अधिक जोर दिया गया है।

 

 

 

 

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