Durga Kavach Pdf Hindi / दुर्गा कवच Pdf Download

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Durga Kavach Pdf Hindi Download

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

दिव्य स्वर्ण अंगूठी बोली – मैं अभी आपकी सहायता करती हूँ। उस दिव्य अंगूठी से एक तेज निकलने लगा। उस तेज को अजगर सहन नहीं कर सका। उसने तुरंत ही मिलन को अपने पेट से बाहर उगल दिया। मिलन बहुत उतावली के साथ आगे बढ़ता जा रहा था।

 

 

 

आगे एक गर्म पानी की झील थी। उसका पानी हमेशा खौलते रहता था। उसके अंदर गिरने से किसी का भी अंत संभव था। मिलन की उतावलीपन को देखकर दिव्य पत्थर का कच्छप मिलन से बोला – स्वामी! आगे भयानक खतरा है। आप हमारे पीठ के ऊपर सवार हो जाइये।

 

 

 

 

मैं आपको उस सुवर्ण जल के सरोवर तक सुरक्षित रूप से पहुंचा दूंगा। कच्छप अपने वृहद आकार में आ गया अभिमंत्रित होने के कारण कच्छप के ऊपर गर्म पानी का किसी प्रकार का प्रभाव नहीं हुआ। वह मिलन को अपने ऊपर बैठाकर गर्म पानी की झील में उतर गया।

 

 

 

 

सुबह होते ही कच्छप और मलन दोनों गर्म पानी के झील के किनारे पहुँच गए। मिलन कच्छप की पीठ से कूदकर झील के बाहर आ गया। कच्छप भी मिलन के समीप पहुंचकर पत्थर के स्वरुप में आ गया था। मिलन बहुत ही प्रसन्न था क्योंकि उसकी अभिलाषा पूर्ण होने का समय आ गया था।

 

 

 

 

वह सरोवर के बने टीले पर जाने का प्रयास कर ही रहा था उतने में कच्छप उसे चेतावनी देते हुए बोला – स्वामी! आपको यहां किन्नर बनकर जाना होगा वह भी अदृश्य रूप में तभी हम चारो आपकी सहायता कर सकते है। मिलन कच्छप से बोला – हमारा किन्नर बनना कैसे संभव हो सकता है?

 

 

 

 

कच्छप मिलन से बोला – अगर आपको सुमन परी को प्राप्त करना है तब आपको किन्नर अवश्य ही बनना होगा। हम सभी आपकी सहायता करेंगे। कच्छप, मत्स्य, अंगूठी तथा चंदन की लकड़ी के सम्मिलित प्रयास से मिलन किन्नर के स्वरुप में परिवर्तित हो गया था।

 

 

 

 

परियो के सुंदर रूप में किन्नर बना हुआ मिलन अदृश्य होकर स्वर्ण सरोवर के क्षेत्र में पहुँच गया था। किन्नर के रूप में मिलन सभी परियो के साथ सुमन और सुलेखा की राह देखने लगा। शनैः शनैः वह समय भी आ गया जब सुलेखा और सुमन के साथ परियां आने वाली थी।

 

 

 

 

दोपहर का समय हो गया था। अकस्मात एक भीनी महक सुवर्ण सरोवर के चारो तरफ विखर गयी। पुनः कुछ समय के उपरांत मंद स्वर में वीणा की स्वर लहरी चारो तरफ सुनाई पड़ी जो इस बात की द्योतक थी कि सभी परियो के आने का समय हो गया है।

 

 

 

 

मधुर खिलखिलाहट के साथ परियो का समूह स्वर्ण सरोवर के समीप आकाश से उतरने लगा। उन्हें देखकर मिलन बहुत उत्साह से भर गया। उसकी आँखे उन परियो में सुमन परी को ढूंढ रही थी लेकिन अगले ही पल मिलन निराश हो गया कारण कि उन परियो के समूह में कही पर भी सुमन परी दिखाई नहीं पड़ रही थी।

 

 

 

 

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