Fal Prakash Pdf in Hindi / फल प्रकाश Pdf Download

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Fal Prakash Pdf / फल प्रकाश पीडीएफ

 

 

 

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

इसे मेरे उत्तर तट पर रहने वाले पाप के समूह बुरे मनुष्यो का अंत कीजिए। कृपालु और रणधीर श्री राम जी ने समुद्र के मन की पीड़ा सुनकर उनका अंत कर दिया।

 

 

 

 

श्री राम जी का भारी बल और पौरुष देखकर समुद्र हर्षित होकर सुखी हो गया। उसने उन दुष्टो का सारा चरित्र कहकर प्रभु को सुना दिया। फिर प्रभु के चरणों की वंदना करके समुद्र चला गया।

 

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

समुद्र अपने घर चला गया – श्री राम जी को उसकी यह सलाह अच्छी लगी। यह चरित्र कलयुग के पाप को हरने वाला है।  तुलसीदास जी ने अपनी बुद्धि के अनुसार ही गाया है।

 

 

 

 

श्री रघुनाथ जी के गुण समूह सुख के धाम, संदेह का नाश करने वाले और विषाद का दमन करने वाले है। अरे मुर्ख मन! तू इस संसार का सारा आशा-भरोसा त्यागकर निरंतर इन्हे गा और सुन।

 

 

 

 

60- दोहा का अर्थ-

 

 

 

रघुनाथ जी का गुणगान सम्पूर्ण सुंदर मंगल का प्रदाता है। जो इसे आदर सहित सुनेंगे वह बिना किसी जहाज के ही भव सागर को तर जायेंगे।

 

 

 

 

श्लोक का अर्थ-

 

 

 

कामदेव के शत्रु शिव जी के सेव्य, भव के भय को हरने वाले, काल रूपी मतवाले हाथी के लिए सिंह के समान, योगियों के स्वामी ज्ञान के द्वारा जानने योग्य, गुणों की निधि।

 

 

 

 

अजेय, निर्गुण, निर्विकार, माया से परे, देवताओ के स्वामी, दुष्ट दलन को तत्पर, ब्राह्मण वृन्द के एक मात्र देवता जल वाले मेघ के समान सुंदर श्याम, कमल के जैसे नेत्र वाले, पृथ्वी पति के रूप में परमदेव श्री राम जी की मैं वंदना करता हूँ।

 

 

 

 

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