Gita Press Gorakhpur Books In Hindi Pdf

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gita Press Gorakhpur Books In Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gita Press Gorakhpur Books In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और यहां से Shiv Tandav Stotram Pdf कर सकते हैं।

 

 

 

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पिता की सीख Pdf यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

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श्री एकनाथ चरित्र Pdf यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

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शिक्षाप्रद पत्र Pdf यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

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श्रीराधा माधव चिंतन Pdf यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

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Kalika Puran Pdf यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

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Durga Kavach Pdf Hindi यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

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Geeta Saar in Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।

 

 

 

 

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

पिंकी अपनी बड़ी बहन से बोली – दीदी! जब उन्हें कोई पच्चीस तीस हजार कमाकर देगा तब वह कही सात हजार रुपये देंगे। व्यापारी आँखों के अंधे नहीं होते दीदी! उनकी आँखे हमारी तुम्हारी आँखों से कही तेज होती है ‘जो सारी दुनिया को चराये उसे कौन बेवकूफ बनाएगा’।

 

 

 

 

प्रिया अपनी छोटी बहन पिंकी से बोली – मैं तो इसे बहुत अच्छा पैसा नहीं समझती। सारे दिन झूठ का महिमा मंडन करना पड़ता है। यह तो ठग विद्या है। परिहास के काम बनता न देखकर प्रिया ने अपनी छोटी बहन को अपमान की किरीट पहनाने लगी।

 

 

 

 

पिंकी अपनी बहन प्रिया को पराजित होते देखकर जोर से हंसने लगी और बोली – दीदी! इस तरह से जितने भी वकील, बैरिस्टर है सभी ठग विद्या करते है। झूठी शहादते तक बनानी पड़ती है उन्हें। उन्ही वकीलों और बैरिस्टरों को हम लोग अपना लीडर कहते है।

 

 

 

 

उन्हें अपनी कौमी सभाओ का प्रधान बनाते है। उनपर फूलो और पैसो की बरसात करते है। अपने मुवक्किल के फायदे के लिए उन्हें क्या नहीं करना पड़ता है और हम लोग उनके नाम पर सड़के, प्रतिमाये और संस्थाए स्थापित कर देते है जो अभागे है या भीरु है वे लोग आत्मा और सदाचार की दुहाई देकर अपने आंसू पोछते है नहीं तो आत्मा और सदाचार को कौन पूछता है।

 

 

 

 

प्रिया खामोश हो गयी थी। अब उसे यह सत्य उसकी सारी वेदनाओ के साथ स्वीकार करना पड़ेगा कि पिंकी सबसे ज्यादा भाग्यवान है। आंगन में गाना बजाना हो रहा था। पिंकी बहुत उमंग के साथ गा रही थी और प्रिया वही बरामदे में उदास होकर बैठी थी।

 

 

 

 

उसके सिर में दर्द होने लगा था। वह तो अभागिन है। रोने के लिए ही पैदा हो गयी है। कोई गाये, कोई नाचे उससे कोई भी प्रयोजन नहीं। इससे अब त्राण भी नहीं। उसे किसी बहाने से पिंकी के घर जाकर उसके असलियत की छान-बीन करनी पड़ेगी।

 

 

 

 

परिहास या अनादर से उसे अपनी तंगदिली का प्रमाण देने के सिवा उसे क्या मिलेगा? अगर वास्तव में पिंकी ने लक्ष्मी को प्राप्त कर लिया है तो वह अपनी ठोककर बैठी रहेगी और समझ लेगी कि दुनिया में कही न्याय और ईमानदारी की साख नहीं है।

 

 

 

 

मगर क्या सचमुच उसे इस विचार से संतोष मिलेगा? यहां सबकी ईमानदारी और सत्यवादिता उसी समय तक है जब तक अवसर नहीं मिलता। जिस दिन मौका मिला सारी सत्यवादी धरी रह जाएगी। यहां कौन ईमानदार है? वही जिसे बेईमानी करने का अवसर नहीं है और न इतनी बुद्धि और मनोबल है कि वह अवसर पैदा कर ले।

 

 

 

 

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