Hast Rekha Gyan Hindi With Picture for Male Pdf

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Hast Rekha Gyan Hindi With Picture for Male Pdf

 

 

 

Hast Rekha Gyan Hindi With Picture for Male Pdf
हस्त रेखा ज्ञान फॉर मेल पीडीएफ 

 

 

 

Shree Suktam Path in Hindi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

दूध, शर्बत,  जल आदि से भरे हुए सोने के कलश तथा जिनका वर्णन नहीं हो सकता है ऐसे अमृत के समान भांति-भांति के सब पकवानो से भरे हुए परात, थाल और अनेक प्रकार के सुंदर बर्तन।

 

 

 

 

2- उत्तम फल तथा और भी अनेक वस्तुए राजा ने हर्षित होकर भेट के लिए पठाए। नाना प्रकार की मूल्यवान मणियों के साथ ही गहने, कपड़े, पशु, पक्षी, घोड़े, हाथी और बहुत तरह की सवारियां।

 

 

 

3- दही, चिउरा और अगणित उपहार की चीजें कांवरो में भरकर कहार चले तथा बहुत प्रकार के सुगंधित एवं सुहावने मंगल द्रव्य और सगुन के पदार्थ राजा ने भिजवाए।

 

 

 

4- अगवानी करने वालो को जब बारात दिखाई पड़ी तब उनके हृदय में आनंद उमड़ उठा और शरीर रोमांच से भर गया। अगवानो को देखकर बारातियों ने प्रसन्न होकर नगाड़े बजाए

 

 

 

बाराती तथा अगवानो में से कुछ हर्षातिरेक से परस्पर मिलने के लिए सरपट दौड़ चले और उनके मिलने से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो दो समुद्र आनंद की मर्यादा छोड़कर मिल रहे हो।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- देव सुंदरियां फूल बरसाते हुए गाना गा रही है और देवता आनंदित होकर नगाड़े बजा रहे है। अगवानी में आये हुए लोगो ने सब प्रकार के सामान दशरथ जी के सामने रखते हुए अत्यंत प्रेम से विनती किया।

 

 

 

2- राजा दशरथ जी ने सब वस्तुओ को ग्रहण कर लिया और वह याचको को बख्शीश देने लगे। तदनन्तर पूजा आदर सत्कार और बड़ाई करके अगवान लोग उनको जनवासे की तरफ ले गए।

 

 

 

3- विलक्षण वस्त्र पांवो के नीचे पड़ रहे है। जिन्हे देखकर कुबेर भी अपने धन का अभिमान त्याग दिए। बड़ा सुंदर जनवासा दिया गया था जहां सबको सब प्रकार की सुविधा थी।

 

 

 

4- बारात को जनकपुर में आयी हुई जानकर सीता जी ने अपनी कुछ महिमा प्रकट करके दिखलाई और उन्होंने हृदय में स्मरण करके सब सिद्धियों को बुलाकर राजा दशरथ की मेहमानी करने के लिए पठाया।

 

 

 

306- दोहा का अर्थ-

 

 

 

सीता जी की आज्ञा सुनकर जहां जनवासा था वहां सब सिद्धियां, सारी सम्पदा सुख और इंद्रपुरी के भोग विलास को लेकर गई।

 

 

 

बेले और वृक्ष मांगने से ही मधु टपका देते है। गौए मनचाहा दूध देती है। धरती सदा खेती सेव भरी रहती है। त्रेता में सत्ययुग की स्थिति हो गयी। समस्त जगत के आत्मा भगवान को जगत का राजा जानकर पर्वतो ने अनेक प्रकार की मणियों की खान प्रकट कर दी। सब नदियां उत्तम, शीतल, निर्मल और सुखप्रद स्वादिष्ट जल प्रवाहित करने लगी।

 

 

 

समुद्र पनि मर्यादा में रहते है। वह लहरों के द्वारा किनारो पर रत्न डाल देते है जिन्हे मनुष्य प्राप्त कर लेते है। सब तालाब कमल से पूर्ण है। दशो दिशाओ के विभाग अत्यंत प्रसन्न है।

 

 

 

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