Hindi Drama Script For School Students Pdf Download

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Hindi Drama Script For School Students Pdf

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

रूप के समुद्र सब भाइयो को देखकर सारा रनिवास हर्षित हो उठा। सासुएँ महान मन से प्रसन्न होकर निछावर और आरती करती है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- श्री राम जी की छवि को देखकर वह प्रेम में अत्यंत मग्न हो गई, प्रेम के विशेष वश में होकर बार-बार चरण पकड़ने लगी। हृदय में प्रीति होने के कारण लज्जा नहीं रह गई। उनके स्वाभाविक प्रेम का यह वर्णन किस प्रकार किया जा सकता है।

 

 

 

2- उन्होंने तो भाइयो सहित श्री राम जी को उबटन कराके स्नान कराया और बड़े प्रेम से षटरस भोजन कराया। सुअवसर जानकर श्री राम जी शील स्नेह से संकच भरी वाणी बोले।

 

 

 

 

3- महाराज अब अयोध्यापुरी को चलना चाहते है। उन्होंने हमे यहां विदाई की आज्ञा लेने के लिए भेजा है। हे माता! आप प्रसन्न से हमे आज्ञा दीजिए और अपना बालक जानकर हमारे ऊपर सदा ही स्नेह बनाये रखियेगा।

 

 

 

 

4- इन वचनो को सुनते ही रनिवास उदास हो गया। सासुओ के मुख से प्रेमवश कोई वाणी नहीं निकल रही है। उन्होंने सब कुमारियों को हृदय से लगाते हुए उनके पतियों को सौपकर बहुत प्रकार से विनती की।

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

विनती करते हुए उन्होंने सीता जी को श्री राम जी को समर्पित किया और हाथ जोड़ते हुए बार-बार कहा हे तात! हे सुजान! मैं बलि जानती हूँ, तुमको तो सबकी गति (हाल) मालूम है।

 

 

 

परिवार को, पुरवासियों को, मुझको और राजा को सीता प्राणो से अधिक प्यारी है। ऐसा जानिएगा। हे तुलसी के स्वामी! इसके शील और स्नेह को देखकर इसे अपनी दासी के समान मानियेगा।

 

 

 

336- दोहा का अर्थ-

 

 

 

तुम पूर्ण काम हो! सुजान शिरोमणि हो! और भाव प्रिय हो! तुम्हे प्रेम प्यारा है। हे राम! तुम भक्तो के गुणों को ग्रहण करने वाले, दोष का नाश करने वाले और दया के धाम हो।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- ऐसा कहते हुए रानी चरणों को पकड़कर चुप हो गई। मानो उनकी वाणी प्रेम के दलदल में समा गई हो। स्नेह से सनी हुई श्रेष्ठ वाणी को सुनकर श्री राम जी ने सास का बहुत प्रकार से सम्मान किया।

 

 

 

2- तब श्री राम जी ने बार-बार हाथ जोड़ते हुए विदा मांगा और प्रणाम किया। आशीर्वाद पाकर फिर सिर नवाकर भाइयो के साथ ही रघुनाथ जी चले।

 

 

 

3- श्री राम जी की सुंदर मूर्ति को हृदय में रखकर सब रानियां स्नेह से शिथिल हो गई। फिर धीरज धरते हुए माताये कुमारियों को बुलाकर बार-बार गले लगाकर भेटने लगी।

 

 

 

4- पुत्रियों को पहुंचाती है, फिर वापस लौटकर मिलती है, परस्पर में बहुत ही प्रीति बढ़ गई। बार-बार मिलती हुई माताओ को सखियों ने जब अलग कर दिया तो ऐसी स्थिति निर्माण हो गई। जैसे तुरंत ही अपने जने हुए बछड़े को गाय से कोई अलग कर दिया हो।

 

 

 

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