असली प्राचीन महा इंद्रजाल Pdf | Indrajal Book In Hindi Pdf

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

तो क्यों न इस बार मैं सुखिया के बैलो की सहायता से अपने खेती के कार्य करूँ? यही सोचते हुए रामू सुखिया के घर पहुँच गया। सुखिया उस समय अपने बैलो को चारा डालने के बाद उनकी पीठ पर अपना हाथ घुमा रहा था। रामू सुखिया के दोनों बैलो को देखकर आश्चर्य से भर उठा।

 

 

 

 

दोनों बैलो के छोटे-छोटे कान घोड़े की कान की तरह ऐंठे हुए थे। एक अजनबी को देखकर दोनों ने अपने कान खड़े कर लिए थे। उनके पैरो की खुर घोड़े की टाप की तरह चमकीली थी और दोनों का रंग भी एक जैसा ही था। एकदम धवल चमकते हुए चांदी की तरह।

 

 

 

 

रामू को देखकर सुखिया ने अभिवादन किया फिर पूछा – रामू भाई! कैसे बीत रही है आज कल। रामू बोला – सुखिया भाई! मैं इस समय थोड़ी मुसीबत में हूँ। सुखिया रामू से बोला – हमारे लिए कोई  बताओ मैं तुम्हारी मुसीबत में अवश्य ही सहायता करूँगा।

 

 

 

 

खरीफ की फसल की बुआई का समय हो गया है। हमारा बैल आसक्त हो गया था इसलिए मैंने कम दाम में ही उसे बेच दिया। खरीफ की बुआई करने में तुमसे सहायता मांगने आया हूँ क्या तुम मुझे अपने बैलो की जोड़ी देकर हमारी फसल की बुआई में सहायता कर सकते हो?

 

 

 

 

सुखिया बोला – अरे रामू भाई! यह हमारे दोनों बैल तुम्हारे बैल की सहायता से ही खेत के कार्य करने में समर्थ हो गए है। तुम्हे जब भी आवश्यकता पड़े अपने कार्य के लिए हमारे बैलो का उपयोग कर सकते हो। रामू सुखिया की बातों से संतुष्ट होकर चला गया।

 

 

 

 

रामू कंधे पर हल रखे हुए अपने खेत की तरफ शेरू और वीरू को साथ लिए जा रहा था। उसे देखकर विघ्न संतोषी गोपी बोला – रामू ने कितनी चालाकी से सुखिया से बैल लेकर अपने खेती का सारा कार्य पूरा कर लिया। जबकि अन्य लोगो की सहायता के नाम सुखिया अपना मुंह फेरकर खड़ा हो जाता है।

 

 

 

 

गोपी की बात सुनकर रामू बोला – अरे विघ्न संतोषी गोपी! क्या तुझे इतना भी पता नहीं है पहले किसी को भी कुछ देना पड़ता है फिर बदले में दूसरे से कुछ प्राप्त किया जा सकता है। हमारी इन बातो को तुम चाहे जैसे समझने की कोशिस करो वह सभी पर समान रूप से लागू होती है।

 

 

 

 

हानि लाभ का विचार किए बिना पहले कुछ देना सीखो उसके प्रत्युत्तर में तुम्हारा उपकार निहित रहेगा। रामू की बातो को विघ्न संतोषी गोपी नहीं समझ सका और खेत की जुताई करने लगा। सभी किसान हल चलाते हुए रामू को देख रहे थे।

 

 

 

 

उसके हाथ में बैल हांकने वाली छड़ी भी नहीं थी फिर भी शेरू और वीरू भली प्रकार से खेत की जुताई कर रहे थे। बीच-बीच में रामू अपने शब्दों से उन दोनों का हौसला अवश्य बढ़ाता था। समय से पहले ही रामू ने खेत का सारा कार्य समाप्त कर लिया था।

 

 

 

 

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