Kaal Bhairav Ashtakam Pdf Hindi / काल भैरव अष्टकम Pdf

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

वह हारु और मेरु को समझाते हुए बोले – तुम लोग एक मनुष्य को साधारण समझकर उसे परेशान करने की कोशिस की है जबकि वह मनुष्य असाधारण शक्तियों का मालिक है। उसकी सहायता कई अदृश्य शक्तियां एक साथ कर रही है।

 

 

 

 

उसकी रखवाली करने वाला कछुआ बहुत ही सम्पन्न है और यह मछली तुम लोगो का पीछा करते हुए यहां तक पहुँच चुकी है। मत्स्यानंद का अनुचर अपने साथ एक मछली  को लेकर आया जिसकी आकृति छोटी थी लेकिन हारु और मेरु को वह छोटी मछली बहुत भयानक लग रही थी।

 

 

 

 

वह दोनों उस कोई मछली को देखकर डर गए तथा छुपने का प्रयास करने लगे। मत्स्यानंद बोले – तुम लोग इस छोटी सी मछली को देखकर इतना क्यों डर रहे हो? वह दोनों बोले – गुरुदेव! यह बहुत भयानक मछली है और आप इसे छोटी मछली कह रहे है।

 

 

 

 

मत्स्यानंद बोले – हमे इस मछली की असलियत पता है। यह अभिमंत्रित एक छोटा सा पत्थर का टुकड़ा है। यह किसी की सहायता करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करता है। जबकि तुम दोनों अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हो यही कारण है कि तुम लोग आज इसके सामने विफल हो गए हो।

 

 

 

 

यह मत्स्य पत्थर पाताल लोक की मत्स्यरानी ने मिलन की सहायता के लिए प्रदान किया है जो कभी परिस्थित के बस पाताल लोक में रानी की अतिथि रह चुका है। वह मनुष्य सुमन नामक परी को ढूंढने का प्रयास कर रहा है। तुम दोनों अगर मिलन का सहयोग करोगे तब यह मछली तुम्हे हानि नहीं पहुँचाने का प्रयास नहीं करेगी।

 

 

 

 

उस मनुष्य के पास चार प्रकार की अभिमंत्रित वस्तुए है किसी का भी उस मनुष्य को हानि पहुंचाने का प्रयास सार्थक नहीं हो सकता है। मत्स्यनंन्द बोले – अब तुम अपने मालिक के पास जाओ। इतना सुनते ही वह पत्थर का टुकड़ा जो मछली के रूप में था वहां से गायब हो गया और मिलन के पास आ गया।

 

 

 

 

मत्स्यानंद ने हारु और मेरु से कहा – तुम दोनों यहां से जाओ और उस मनुष्य की सहायता करो ताकी वह अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त कर सके। इतना तुम दोनों अवश्य ध्यान रखना कि वह मनुष्य पाताल लोक की रानी का अतिथि रह चुका है और वह पाताल लोक की मत्स्यरानी का बहन है।

 

 

 

 

अतः तुम दोनों की उसकी सहायता करना ही पड़ेगा। हारु अपने गुरु की आज्ञा मानकर अपने अनुचर मेरु के साथ मिलन के पास चल दिया। कछुआ मिलन की सुरक्षा में लगा हुआ था। हारु और मेरु को अपनी तरफ आते हुए देखकर बोला – यह दोनों फिर इधर क्यों आ रहे है?

 

 

 

 

मत्स्य पत्थर कछुआ से बोला – यह दोनों यहाँ मैत्री भाव से आ रहे है अब यह लोग मिलन को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकते है। हारु और मेरु आकर मिलन के सामने नतमस्तक होते हुए बोले – हम आपकी सहायता करना चाहते है आप हमे आज्ञा प्रदान करे कि हमे क्या करना है?

 

 

 

 

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