Kamayani Pdf in Hindi / कामायनी Pdf Download

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Kamayani Pdf in Hindi Download

 

 

पुस्तक का नम्म  Kamayani Pdf in Hindi
पुस्तक के लेखक  जयशंकर प्रसाद 
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  8 Mb 
पृष्ठ  308 
भाषा  हिंदी 
श्रेणी  धार्मिक 

 

 

 

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इसी तरह शूद्र ब्राह्मणो के आचार में तत्पर होंगे उनकी आकृति उज्ज्वल होगी अर्थात वे अपना धर्म-कर्म छोड़कर उज्ज्वल वेश-भूषा से विभूषित हो व्यर्थ घूमेंगे। वे स्वभावतः ही अपने धर्म का त्याग करने वाले होंगे। ववे कुटिल और द्विज निंदक होंगे।

 

 

 

 

अपने को कुलीन मानकर चारो वर्णो के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करेंगे। समस्त वर्णो को अपने सम्पर्क से भ्रष्ट करेंगे। वे लोग अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर द्विजोचित सत्कर्मो का अनुष्ठान करने वाले होंगे। कलियुग की स्त्रियां प्रायः सदाचार से भ्रष्ट और पति का अपमान करने वाली होंगी।

 

 

 

 

सास-ससुर से द्रोह करेंगी। किसी से भय नहीं मानेंगी। मलिन भोजन करेंगी और वे अपने पति की सेवा से सदा ही विमुख रहेंगी। सूत जी! इस तरह जिनकी बुद्धि नष्ट हो गयी है,  जिन्होंने अपने धर्म का त्याग कर दिया है ऐसे लोगो को परलोक और इहलोक में उत्तम गति कैसे प्राप्त होगी?

 

 

 

 

इसी चिंता से हमारा मन हमेशा व्याकुल रहता है। परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नही है अतः जिस छोटे से उपाय से इन सबके पापो का तत्काल नाश हो जाय उसे इस समय कृपा पूर्वक बताइये क्योंकि आप समस्त सिद्धांतो के ज्ञाता है।

 

 

 

 

व्यास जी कहते है – उन भवितात्मा मुनियो की यह बात सुनकर सूत जी मन ही मन भगवान शंकर का स्मरण करके उनसे इस प्रकार बोले। सूट जी कहते है महात्माओ आपने बहुत अच्छी बात पूछी है आपका यह प्रश्न तीनो लोको का हित करने वाला है।

 

 

 

 

मैं गुरुदेव व्यास का स्मरण करके आप लोगो के स्नेह वश इस विषय का वर्णन करूँगा आप आदर पूर्वक सुने। सबसे उत्तम जो शिव पुराण है वह वेदांत का सार सर्वस्व है तथा वक्ता और श्रोता का समस्त पाप राशियों से उद्धार करने वाला है। इतना ही नहीं वह परलोक में परमार्थ वस्तु को देने वाला है।

 

 

 

 

कलिकी कल्मष राशि का विनाश करने वाला है। उसमे भगवान शिव के उत्तम यश का वर्णन है। ब्राह्मणो! अर्थ, धर्म, मोक्ष और काम इन चारो पुरुषार्थो को देने वाला वह पुराण हमेशा ही अपने प्रभाव की दृष्टि से विस्तार को प्राप्त हो रहा है।

 

 

 

 

विप्रवरो! उस सर्वोत्तम शिव पुराण के अध्ययन मात्र से वे कलियुग के पापासक्त जीव श्रेष्ठतम गति को प्राप्त हो जायेंगे। कलियुग के महान उत्पात तभी तक जगत में निर्भय होकर विचरेंगे जग तक यहां शिव पुराण उदय नही होगा इसे वेद के तुल्य माना गया है।

 

 

 

 

इस वेदकल्प पुराण का सबसे पहले भगवान शिव ने ही प्रणयन किया था। विद्येश्वर संहिता, विनायक संहिता, रूद्र संहिता, मातृ संहिता, उमा संहिता, एकादशरुद्रसंहिता, कोटिरूद्र संहिता, कैलास संहिता, सहस्रकोटि रूद्र संहिता, धर्म संहिता तथा वायवीय संहिता इस प्रकार इस पुराण के बारह भेद है।

 

 

 

 

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