मानस का हंस उपन्यास Pdf | Manas Ka Hans In Hindi PDF

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पुस्तक का नाम  मानस का हंस उपन्यास Pdf
पुस्तक के लेखक  नागर अमृतलाल
भाषा  हिंदी 
साइज  19.4 Mb 
पृष्ठ  382

 

 

 

 

 

Manas Ka Hans PDF

 

 

 

 

श्रावण कृष्णपक्ष की रात। मूसलाधार वर्षा, बादलों की गडगडाहट और बिजली की कडकन से धरती लरज-लरज उठती है। एक खंडहर देवालय के भीतर बौछारों से बचाव करते सिमटकर बैठे हुए तीन व्यक्ति विजली के उजाले मे पलभर के लिए तनिक से उजागर होकर फिर अधेरे मे विलीन हो जाते है। स्वर ही उनके अश्रस्तित्व के परिचायक है।

 

 

 

 

 

बादल ऐसे गरज रहे हैं मानो संर्वग्रासिनी काम क्षुधा किसी सत के अतर आलोक को निगलकर दम्भ-भरी डकारे ले रही हो। वौछारे पछतावे के तारो-सी सनसना रही है। वीच-बीच में बिजली भी वैसे ही चमक उठती है जैसे कामी के मन में क्षण-भर के लिए भक्ति चमक उठती है।

 

 

 

 

 

इस पतित की प्रार्थना स्वीकारे गुरू जी, अब अधिक कुछ न कहे। मेरे प्राण भीतर-बाहर कही भी ठहरने का ठौर नही पा रहे है। आपके सत्य वचनों से मेरी विवशता पछाड़े खा रही है। हा एक रूप में विवशता इस समय हमे भी सता रही है। जो ऐसे ही वरसता रहा तो हम सबेरे राजापुर कैसे पहुच सकेगे रामू?

 

 

 

 

 

राम जी कृपालु हे प्रभु। राजापुर अव अधिक दूर भी नही है। हो सकता है, चलने के समय तक पानी रुक जाय।”
तीसरे स्वर की वात सच्ची सिद्ध हुई। घड़ी-भर मे ही बरखा थम गई। अधेरे मे तीन आकृतिया मन्दिर से बाहर निकलकर चल पड़ी। डाउनलोड करने के लिए नीचे दी गयी बटन पर क्लिक करे।

 

 

 

 

 

Manas Ka Hans In Hindi PDF Download

 

 

 

 

Manas Ka Hans In Hindi PDF

 

 

 

 

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