Manovigyan Book In Hindi / मनोविज्ञान बुक

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

परीलोक में रानी परी का दरबार लगा हुआ था। दरबार में मनरोंजन के कई कार्यक्रम चल रहे थे। एक एक करके सभी परियां सुमन से धरती पर बिताये गए पल को जानना चाहती थी। सुमन भी सभी परियो की जिज्ञासा को शांत कर रही थी।

 

 

 

 

कई परियां धरती के जीवन को परीलोक से उत्तम मानती थी क्योंकि उन सभी का विचार था कि धरती पर मनुष्यो को अधिक स्वतंत्रता है और परीलोक में अनेको प्रकार का बंधन है। रानी परी सुलेखा ने सुमन से पूछा – सुमन तुम यह बताओ परीलोक और धरती के जीवन में कौन सा जीवन उत्तम है?

 

 

 

 

सुमन रानी परी से बोली – हमारे विचार से धरती का जीवन सबसे अच्छा है। इसका यह कारण है कि वहां सभी लोग अपने विचार और कार्य के लिए स्वतंत्र है जबकि यहां परीलोक में कई प्रकार की बाध्यता है जैसे कि आपके इस दरबार में किसी भी नर के लिए प्रतिबंध है।

 

 

 

 

यहां मादा या फिर किन्नर ही रह सकते है लेकिन धरती पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है वहां सभी लोग एकसाथ रह सकते है। धरती पर यहां की अपेक्षा बहुत सारी भिन्नता है। इसलिए देवता भी धरती पर जन्म लेने के लिए उत्साहित रहते है। रानी परी सुलेखा ने कहा – तुम्हारी बातो से ऐसा प्रतीत होता है कि तुम्हे यह परीलोक पसंद नहीं है।

 

 

 

 

सुमन बोली – नहीं रानी साहिबा! हमारा यह अभिप्राय कत्तई नहीं है। मैं तो यह कह रही थी कि जो कोई जहां रहता है उसके लिए वही स्थान सबसे सुंदर हो जाता है और जिसके द्वारा सभी संरक्षण और सुरक्षा प्रदान किया जाता है तो संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करने वाले को ही राजा कहा जाता है।

 

 

 

 

यहां की सभी परियां व किन्नर आपके द्वारा सुरक्षित और संरक्षित है अतः यहां के सभी लोगो की स्वामी, रानी आप है। सुमन परी के इन सुलझे हुए उत्तर से परियो की रानी सुलेखा संतुष्ट हो गयी। सुमन परी अपनी सुलझी बातों से परीलोक और रानी सुलेखा की प्रसंशा कर दिया और उदाहरण के साथ ही धरती की सुंदर ढंग से बड़ाई भी कर दिया था।

 

 

 

 

रानी सुलेखा ने सुमन से कहा – सुमन तुम हमे धरती के ऐसे संस्मरण सुनाओ जिसने तुम्हे बहुत प्रभावित किया हो। हमे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम धरती पर रहते हुए वार्तालाप करने की कला में प्रवीण हो चुकी हो इसके लिए तुम बधाई की पात्र हो।

 

 

 

 

धन्यवाद कहते हुए सुमन धरती के संस्मरण रानी सुलेखा को सुनाने लगी। सुमन कह रही थी – यहां से जाने के बाद मैं धरती पर विचरण कर रही थी। हमारे रहने का ठिकाना तो कही नहीं था। एक आवारा लड़का था उसका नाम राममिलन था।

 

 

 

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