Mayamatam Vastu Shastra in Hindi Pdf / मयमतम Pdf

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Mayamatam Vastu Shastra in Hindi Pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम  Mayamatam Vastu Shastra in Hindi Pdf
पुस्तक के लेखक 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  5 Mb 
पृष्ठ  230 
श्रेणी  ग्रंथ 

 

 

 

Mayamatam Vastu Shastra in Hindi Pdf
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Mayamatam Vastu Shastra in Hindi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

सुखिया ने रामू से पूछा – शेरू और वीरू के साथ तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं हुई। रामू बोला – शेरू और वीरू को तुमने इतना अच्छे ढंग से प्रशिक्षित किया है कि गलती इन दोनों को देखकर दूर भाग जाती है और गलती नहीं होने से परेशानी का सवाल ही कहाँ रहता है।

 

 

 

 

सुखिया ने शेरू और वीरू को जुआ से खोलकर अलग करके उन्हें खूंटे से बांध दिया। हौद में चारा पानी डालकर शेरू और वीरू की पीठ पर हाथ फेरने लगा। शेरू और वीरू के पीठ पर सुखिया का हाथ फेरना उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं था।

 

 

 

 

दोनों चारा खाने के बाद संतोषपूर्ण मुद्रा में अपने मालिक सुखिया की तरफ देख रहे थे कि उनका मालिक दोनों की कितनी कद्र करता है। सुखिया ने शेरू और वीरू को चारा खिलाने के बाद आराम के लिए दूसरे खूंटे पर बांध दिया था।

 

 

 

 

वहां दोनों बैल जुगाली करते हुए बैठ गए जो इस बात का संकेत था कि शेरू और वीरू सुखिया के पास संतुष्ट है। रामू अपने घर जाने से पहले सुखिया से बोला – सुखिया भाई! तुम हमे एक दिन के लिए शेरू और वीरू को दे देना फिर हमारे खेत का कार्य समाप्त हो जायेगा।

 

 

 

 

सुखिया रामू से बोला – ठीक है तुम जल्दी से बुआई कर लो नहीं तो हमारी बुआई पिछड़ जाएगी। सुखिया के शेरू और वीरू का नाम कई गांवो में फ़ैल गया था। उन्हें देखने के लिए कई लोगो का तांता लगा रहता था। कोई सुखिया से पूछता इन्हे कहाँ से खरीदकर लाये हो।

 

 

 

 

कोई पूछता – इन्हे बेचोगे क्या? अगर बेचना होगा तो हमे दे देना। कई लोग कहते – सुखिया ने इन्हे बड़े जतन से पाला पोसा है यह सब घर के बछड़े है। सुखिया को यह सब सुनकर बहुत प्रसन्नता होती थी कि लोग बार-बार शेरू और वीरू की इतनी बड़ाई कर रहे है।

 

 

 

 

 

अगर छुपाकर रखने की वस्तु होती तब सुखिया बहुत पहले ही शेरू और वीरू को सबकी आँखों से ओझल कर देता। सुबह रामू सुखिया के पास आ गया। सुखिया ने शेरू और वीरू को खिला पीला कर तैयार कर रखा था। रामू ने दोनों की गर्दन में जुआ डाल दिया।

 

 

 

 

सुखिया ने उनकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा – जाओ! आज इनके खेत में काम करने का आखिरी दिन है। अच्छे से कार्य करना। शेरू और वीरू गर्दन हिलाते हुए हल्की सी हुंकार भरी और रामू के साथ चल दिए। उन दोनों के गले में पड़े हुए घुंघरू और घंटियों से मधुर स्वर उत्पन्न होने लगा जिससे सभी किसानो ने कपास लगा लिया कि शेरू और वीरू आ रहे है।

 

 

 

 

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