Nakshatra Phal Darpan Pdf / नक्षत्र फल दर्पण Pdf

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Nakshatra Fal Darpan Pdf / नक्षत्र फल दर्पण पीडीएफ

 

 

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मैं निश्चय के साथ कहती हूँ कि स्वप्न चार दिनों बाद सत्य होकर रहेगा। उसके वचन सुनकर वह सभी राक्षसियाँ डर गयी और जानकी जी के चरणों में गिर पड़े।

 

 

 

 

11- दोहा का अर्थ-

 

 

 

तब इसके बाद वह जहां-तहां चली गयी। सीता जी मन में सोच करने लगी कि एक महीने बीतने के बाद नीच राक्षस रावण मुझे परलोक भेज देगा।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

सीता जी हाथ जोड़कर त्रिजटा से बोली – हे माता! तू मेरी विपत्ति की संगिनी है। जल्दी से कोई ऐसा उपाय कर जिससे मैं शरीर को छोड़ सकूँ। विरह असह्य हो चला है। अब यह सहा नहीं जाता है।

 

 

 

रावण की इतनी कठोर दुःख भरी वाणी को कौन सुने? सीता जी के वचन सुनकर त्रिजटा ने चरण पकड़कर उन्हें समझाया और प्रभु का प्रताप, बल और सुयश सुनाया।

 

 

 

उसने कहा – हे सुकुमारी! सुनो, रात्रि के समय उजाला नहीं रहेगा। ऐसा कहकर वह अपने घर चली गई। सीता जी मन में कहने लगी क्या करू? विधाता ही विपरीत हो गया है।

 

 

 

 

न उजाला मिलेगा, न पीड़ा मिटेगी। आकाश में अग्नि प्रकट में दिखाई दे रहे है, पर पृथ्वी पर एक भी तारा नहीं आता है। चन्द्रमा अग्निमय होकर भी मुझे हतभागी जानकर अग्नि नहीं बरसाता है।

 

 

 

 

हे अशोक वृक्ष! मेरी विनती सुन! मेरा शोक हरण करके अपना अशोक नाम सत्य कर दे। तेरे नए और कोमल पत्ते अग्नि के समान है। अग्नि दे, विरह रोग को बढ़ाकर सीमा तक न पहुंचा। सीता जी को विरह से परम व्याकुल देखकर वह क्षण हनुमान जी को कल्प के समान बीता।

 

 

 

 

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