Prithviraj Raso In Hindi Pdf / पृथ्वीराज रासो इन हिंदी Pdf

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Prithviraj Raso In Hindi Pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम  Prithviraj Raso In Hindi Pdf
पुस्तक के लेखक  चंद बरदाई
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  6.8 Mb 
पृष्ठ  241 
श्रेणी  इतिहास 
भाषा  हिंदी

 

 

 

 

Prithviraj Raso In Hindi Pdf
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Akbarnama In Hindi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

उसके लिए एक हजार रुपये आत्म सम्मान के लिए बहुत था। पांच हजार तो किसी भी हालत में नहीं। प्रिया ने पिंकी से पूछ ही लिया – जब एजेंट के काम में इतना वेतन और भत्ता मिलता है तो यह सारे कालेज बंद क्यों नहीं हो जाते? हजारो लड़को को अपनी जिंदगी खराब करने की आवश्यकता क्या है?

 

 

 

 

पिंकी अपनी बहन प्रिया को खिसियानेपन का आनंद उठाती हुई बोली – बहन तुम यहां भूल कर रही हो। कोई पढ़ने में अपनी पूरी जिंदगी निकाल ही क्यों न दे लेकिन जरुरी नहीं कि अच्छा एजेंट भी बन जाए। अपने माल की श्रेष्ठता और विश्वास पैदा कर देना कि इससे अच्छा माल आपको बाजार में नहीं मिल सकता कोई आसान काम नहीं है।

 

 

 

 

एक से एक घाघ लोगो से एजेंट का सामना होता है। भले ही कोई एम.ए. पास हो जाए मगर एजेंट बनकर अपने माल की श्रेष्ठता सिद्ध करना सबके बस की बात नहीं है। यह तो ईश्वर की देन है। दूसरे के सामने श्रेष्ठता सिद्ध करने में निपुण होना एक कला जो सबके पास नहीं होती है।

 

 

 

 

बड़े-बड़े राजा और रईसों के सामने जाकर बात करना मामूली काम नहीं है। एक साधारण आदमी की तो नवाबो और रईसों के सामने पहुँच ही नहीं रहती है अगर वहां पहुँच भी गया तो जबान भी नहीं खुलती। राजा रईस और नवाब लोगो का मत फेरना पड़ता है तब जाके कही माल बिकता है।

 

 

 

 

 

पहले इन्हे भी संकोच होता था अब तो इस सागर में मगर है। अगले साल इनकी तरक्की होने वाली है। प्रिया की धमनियों की गति जैसे बंद पड़ रही थी। निर्दयी आकाश गिर क्यों नहीं जाता। यह कहां का न्याय है प्रिया जो पति पारायण है, सुघड़ है, रूपवती है और अपने बच्चो को आदर्श की बात सिखाती है।

 

 

 

 

थोड़े में ही अपनी गृहस्थी को अच्छे ढंग से निर्वाह कर लेती है उसकी ऐसी दुर्गति! पिंकी की ऐसी बातो को सुनकर यह पाषाण हृदया धरती फट क्यों नहीं जाती। यह घमंडिन, बद्तमीज जो अभी तक सिर खोलकर घुमा करती थी। वह विलासिनी, चंचल, मुंहफट छोकरी रानी बन जाए?

 

 

 

 

उसे अब भी कुछ आशा बाकी थी। शायद आगे चलकर उसके चित्त को शांति प्रदान करने वाला कोई मार्ग निकल आये। पिंकी बोली – आजकल दुनिया पैसा देखती है। आजकल ही क्यों? हमेशा ही धन की बहुत महिमा रही है। पैसे कैसे आये है यह कोई नहीं देखता।

 

 

 

 

पैसे वाले को ही पूजते है। प्रिया पिंकी से परिहास के स्वर में बोली – तब शायद तेरे शौहर को दस हजार मिलने लगे? पिंकी अपनी बहन प्रिया से बोली – दस हजार तो नहीं सात हजार में तो कोई संदेह नहीं है? प्रिया अपनी छोटी बहन से फिर बोली – कोई आँखों का अँधा मालिक फंस गया होगा?

 

 

 

 

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