Rahasyamayi Kitab Pdf / रहस्यमयी किताब Pdf Download

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Rahasyamayi Kitab Pdf / रहस्यमयी किताब पीडीएफ

 

 

 

पुस्तक का नाम  रहस्यमयी किताब
पुस्तक के लेखक  रामनाथ सुमन 
पुस्तक की भाषा  हिंदी 
फॉर्मेट  Pdf
साइज  25 Mb
श्रेणी  बुक 
कुल पृष्ठ  302

 

 

 

रहस्यमयी किताब पीडीऍफ़ डाउनलोड 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

प्रभु ने उन्हे ऐसा कहते हुए दंडवत करते देखा तो वह अत्यंत हर्षित होकर तुरंत उठे। विभीषण के दीन वचन सुनकर प्रभु ने बहुत ही सुख माना। उन्होंने अपनी विशाल भुजाओ से पकड़कर उनको हृदय से लगा लिया।

 

 

 

छोटे भाई लक्ष्मण सहित गले मिलकर उनको अपने पास बैठाकर श्री राम जी भक्तो के भय को हरने वाले वचन बोले – हे लंकेश! परिवार सहित अपनी कुशल कहो। तुम्हारा निवास तो कुठौर है।

 

 

 

दिन रात दुष्टो की मंडली में रहते बसते हो। ऐसी दसा में हे सखे! तुम अपने धर्म का पालन किस प्रकार से करते हो? मैं तुम्हारी सब रीति जनता हूँ। तुम अत्यंत नीति निपुण हो तुम्हे अनीति नहीं सुहाती है।

 

 

 

हे तात! नगर में रहना वरन अच्छा है। परन्तु विधाता दुष्ट का संग कभी न दे। विभीषण जी ने कहा – हे रघुनाथ जी! अब आपके चरणों का दर्शन करके कुशल से हूँ जो आपने अपना सेवक जानकर मुझपर दया की है।

 

 

 

46- दोहा का अर्थ-

 

 

 

तब तक जीव की कुशल नहीं और न स्वप्न में भी उसके मन को शांति है। जब तक वह शोक के घर काम को छोड़कर श्री राम जी को नहीं भजता है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

लोभ, मोह, और मान आदि  तभी तक हृदय में बसते है जब तक की श्री रघुनाथ जी हृदय में नहीं बसते है।

 

 

 

ममता पूर्ण अंधेरी रात है, जो राग-द्वेष रूपी उल्लुओ को सुख प्रदान करती है। वह तभी तक जीव के मन में बसती है जब तक प्रभु आपका प्रताप रूपी सूर्य उदय नहीं होता।

 

 

 

 

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