रत्न सागर Pdf | Ratna Sagar Pdf

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Ratna Sagar Pdf

 

 

 

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तुलसी साहब ने अपनी बानी में कही कही बेद कतेब कुरान पुरान राम रहीम और प्रचलित मतों का खोलकर खंडन किया है जिससे लोग उन्हें निंदक और द्रोही समझते है पर यह उनकी अनसमझता की बात है। तुलसी साहब के पदों के अर्थ पर ध्यान देने से स्पष्ट जान पड़ता है कि उन्होंने किसी मत को झूठा नहीं ठहराया है।

 

 

 

वरन जहां तक जिसकी गति है उसको साफ तौर पर बतला दिया है। उनका अभिप्राय केवल यह है कि समस्त ऊँचे हुए समस्त पिंड और ब्रह्माण्ड के धनियो के धनी का बांधना चाहिए और उसी की सेवा करनी चाहिए। निर्मल चैतन्य देश के लोको के धनियो की भक्ति करने से परिश्रम तो उतना ही पड़ेगा और लाभ पूरा न उठेगा।

 

 

 

अर्थात भक्त का काम अधूरा रह जायेगा और वह आवागवन से न छूटेगा देर सबेर जन्म मरन का चक्कर लगा रहेगा क्योंकि यह लोक माया के घेरे में है चाहे वह कितनी ही सूक्ष्म माया हो। तुलसी साहब के बिषय में कहते है कि जब आप सत्संग कराते थे। …….किताब को पूरा पढ़ने के लिए नीचे दी गयी बटन पर क्लिक करे।

 

 

 

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