Rudraymala Tantra Pdf / रुद्रायमल तंत्र Pdf Download

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

मिलन को प्यास लगी थी। व्वह स्वर्ण पर्वत से गिरते हुए झरने से पानी पीने के लिए उस झरने के समीप गया और एक चुल्लू पानी उठाकर पीया फिर दूसरी बार पानी के लिए झर्न में हाथ डाला तभी उसे लगा कोई उसे पकड़कर खींच रहा है। वह बहुत प्रयास  के बाद भी वह खुद को सुरक्षित  नहीं रख पाया और झरने में गिर गया।

 

 

 

 

झरने में गिरते समय उसे इतना ही सुनाई पड़ा तुम्हे उद्देश्य में सफल होने के लिए बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। मिलन को पकड़ने वाला एक जल दैत्य था। मिलन के दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में पुनीत महाराज की दी हुई स्वर्ण अंगूठी थी उसके प्रभाव से ही वह सुरक्षित था।

 

 

 

 

जबकि मिलन को पकड़ने वाला जल दैत्य की चेतना स्वर्ण अंगूठी के प्रभाव से विलुप्त हो गयी थी। वह दोनों झरने की तिव्र धारा में बहते चले जा रहे थे। बहता हुआ वह झरना पाताल लोक के मुहाने पर जाकर विलुप्त हो गया। उस मुहाने पर दो मत्स्य कन्या पाताल लोक की रखवाली करने के लिए तत्पर थी।

 

 

 

 

उन्हें इस बात का सदैव अंदेशा बना रहता था कही पृथ्वी से कोई मानव यहां न आ जाए। जल दैत्य के रहने पर भी मत्स्य रानी के आदेश का कठोरता से पालन करना पड़ता था। लेकिन आज चेतना शून्य जल दैत्य के साथ एक मानव को देखकर दोनों मत्स्य कन्या अचंभित हो गयी।

 

 

 

 

मिलन खुद को पूरी तरह सुरक्षित देखकर महाराज पुनीत को अपने मन में धन्यवाद कह रहा था। एक मत्स्य कन्या मिलन की रखवाली कर रही थी। दूसरी मत्स्य कन्या दौड़ते हुए रानी के पास गयी। मत्स्य कन्या को दरबार में आयी हुई देखकर मत्स्य रानी ने पूछा – तुम यहां क्यों आयी हो और कंचन कहाँ है?

 

 

 

 

मत्स्य कन्या बोली – रानी साहिबा! मैं आपको यही बताने के लिए यहां आयी हूँ कि एक मानव आया हुआ है और कंचन उसकी रखवाली कर रही है। मत्स्य रानी बोली – जल दैत्य कहाँ है उसके रहते हुए वह मानव यहां तक कैसे पहुँच गया?

 

 

 

 

मत्स्य कन्या बोली – उस मानव के साथ जल दैत्य भी आया हुआ है लेकिन उसकी चेतना विलुप्त हो चुकी है जबकि मानव पूरी तरह से सुरक्षित है। मत्स्य रानी बोली – वह कोई साधारण मानव नहीं है। तुम जाओ उसे आदर के साथ हमारे सामने उपस्थित करो।

 

 

 

 

उधर मत्स्य कन्या को देखकर मिलन उससे पूछा – तुम कौन हो और मैं इस समय कहाँ हूँ? वह मत्स्य कन्या मिलन की भाषा नहीं समझ सकी उसने इंकार में अपना सिर हिला दिया।

 

 

 

 

जल दैत्य की चेतना वापस लौट चुकी थी। वह हड़बड़ाकर उठ गया फिर मिलन को देखते ही उछलकर दूर खड़ा होकर विचित्र भाषा में मत्स्य कन्या से कहने लगा – इस मानव को तुम लोग छूने की कदापि कोशिस नहीं करना नहीं तो फिर तुम्हारा भी हाल मेरे जैसा हो जायेगा।

 

 

 

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