Sahitya Darpan Pdf | साहित्य दर्पण Pdf Download

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Sahitya Darpan Pdf Download

 

 

पुस्तक का नाम  Sahitya Darpan Pdf
पुस्तक के लेखक  विश्वनाथ कविराज 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी  
साइज  39 MB
पृष्ठ  989
श्रेणी 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

बिना प्रेम के केवल योग, तप, ज्ञान और वैराग्य आदि करने से श्री रघुनाथ जी नहीं मिलते है। अतएव तुम सत्संग के लिए वहां जाओ जहां उत्तर दिशा में एक सुंदर नील पर्वत है। वहां परम सुशील काकभुशुण्डि जी रहते है। वह राम भक्ति के मार्ग में परम प्रवीण है। ज्ञानी है गुण के धाम है और बहुत काल के है।

 

 

 

 

वह निरंतर श्री राम जी कथा कहते रहते है। जिसे नाना प्रकार के श्रेष्ठ आदर सहित सुनते है। वहां जाकर श्री हरि के गुणों को सुनो। उनके सुनने से मोह से उत्पन्न तुम्हारा सब दुःख दूर हो जायेगा। मैंने उसे जब समझाकर सब कहा तब वह मेरे चरणों में सिर नवाकर हर्षित होकर चला गया।

 

 

 

 

हे उमा! मैंने उसको इसलिए नहीं समझाया कि मैं श्री राम जी की कृपा से उसका सारा भेद जान गया था। उसने कभी अभिमान किया होगा जिसको कृपानिधान श्री राम जी नष्ट करना चाहते है। फिर कुछ इस कारण से भी मैंने उसको अपने पास नहीं रखा कि पक्षी पक्षी की ही भाषा समझते है। हे भवानी! प्रभु की माया बहुत ही बलवती है ऐसा कौन सा ज्ञानी है जो उसके द्वारा मोहित नहीं होता?

 

 

 

 

फिर हनुमान जी ने जैसे लंका में प्रवेश किया और जिस प्रकार से सीता जी को धीरज दिया सो सब कहा। अशोक वन को उजाड़कर, रावण को समझाकर, लंका पुरी का विध्वंस कर जिस प्रकार उन्होंने समुद्र को लाँघा और जिस प्रकार से सब वानर वहां आये। जहां श्री रघुनाथ जी थे और आकर जानकी जी की कुशल सुनाई।

 

 

 

 

फिर जिस प्रकार सेना सहित श्री रघुवीर जी जाकर समुद्र के तट पर उतरे और जिस प्रकार विभीषण जी आकर उनसे मिले वह सब और समुद्र के बाँधने की कथा उसने सुनाई।

 

 

 

आपका सुंदर यश पुराणों, वेदो में और शास्त्रों में प्रकट है। देवता, मुनि और संत समुदाय उसका गान करते है। आप करुणा करने वाले और झूठे मद का नाश करने वाले, सब प्रकार से कुशल श्री अयोध्या जी के भूषण ही है। आपका नाम कलयुग के पापो को मथ डालने वाला और ममता का अंत करने वाला है। हे तुलसीदास के प्रभु! शरणागत की रक्षा कीजिए।

 

 

 

 

श्री राम जी के गुण समूह का प्रेम पूर्वक वर्णन करके मुनि नारद जी शोभा के समुद्र प्रभु को हृदय में रखकर ब्रह्मलोक को चले गए। शिव जी कहते है – हे गिरिजे! सुनो, मैंने यह उज्वल कथा जैसी मेरी बुद्धि थी वैसी पूरी कह डाली। श्री राम जी का चरित्र अपार है। श्रुति और शारदा भी उनका वर्णन नहीं कर सकते है। भगवान श्री राम जी अनंत है, उनके गुण अनंत है, जन्म, कर्म और नाम भी अनंत है।

 

 

 

 

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