Sampurna Guru Charitra Pdf / सम्पूर्ण गुरु चरित्र Pdf

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Sampurna Guru Charitra Pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम  Sampurna Guru Charitra Pdf
पुस्तक के लेखक  परशुराम 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  मराठी 
साइज  40.7 Mb 
पृष्ठ  318 
श्रेणी  जीवन चरित्र 

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

ऐसा कहकर मुनि वशिष्ठ जी घर आये। वह कृपासागर श्री राम जी के मन को बहुत ही अच्छे लगे। तदनन्तर सेवको को सुख देने वाले श्री राम जी ने हनुमान जी तथा भरत जी आदि भाइयो को साथ लिया और फिर कृपालु श्री राम जी नगर के बाहर गए और वहां उन्होंने हाथी, रथ और घोड़े मंगवाए।

 

 

 

 

उन्हें देखकर कृपा करके प्रभु ने सबकी सराहना किया और जिसने जो चाहा उसको उचित जानकर दिया। संसार के सभी श्रम को हरने वाले प्रभु ने हाथी, घोड़े आदि बाँटने में श्रम का अनुभव किया और श्रम मिटाने के लिए वहां गए जहां शीतल अमराई थी। वहां भरत जी ने अपना वस्त्र बिछा दिया। प्रभु उसपर बैठ गए और सब भाई उनकी सेवा करने लगे।

 

 

 

 

उस समय पवन पुत्र हनुमान जी पंखा करने लगे। उनका शरीर पुलकित हो गया और नयन में प्रेम का जल भर आया। शिव जी कहने लगे – हे गिरिजे! हनुमान जी के समान न तो कोई बड़भागी है और न कोई श्री राम जी के चरणों का प्रेमी ही है जिनके प्रेम और सेवा की स्वयं प्रभु ने अपने श्री मुख से बार-बार बड़ाई किया है।

 

 

 

 

उस अवसर पर नारद मुनि हाथ में वीणा लिए हुए आये। वह श्री राम जी की सुंदर और नित्य नवीन रहने वाली कीर्ति का गान करने लगे।

 

 

 

 

कृपा पूर्वक देख लेने से ही शोक के छुड़ाने वाले हे कमलनयन! मुझ पर भी दया दृष्टि कीजिए। हे हरि! आप नील कमल के समान श्याम वर्ण और कामदेव के शत्रु महादेव जी के हृदय कमल के मकरंद ‘प्रेम रस’ के पान करने वाले भ्रमर है। आप राक्षसों की सेना के बल को तोड़ने वाले है।

 

 

 

 

मुनि और संत जनो को आनंद देने वाले और पापो का नाश करने वाले है। ब्राह्मण रूपी खेती के लिए आप नए मेष समूह है और शरणहीनो को शरण देने वाले और दीन जनो को अपने आश्रय में ग्रहण करने वाले है। अपने बाहुबल से पृथ्वी के बहुत भारी बोझ को नष्ट करने वाले, खर दूषण और विराध का अंत करने में कुशल रावण के शत्रु आनंद स्वरुप राजाओ में श्रेष्ठ और दशरथ के कुलरूपी कुमुदिनी के चन्द्रमा श्री राम जी! आपकी जय हो।

 

 

 

 

महारानी के पास पहुँचने पर ज्योति स्वरुपा ने अपने शक्ति के प्रभाव से पता लगाया। उसे मालूम हो गया कि परियो की महारानी ने मस्तक दर्द का बहाना किया हुआ है। उसका उद्देश्य ज्योति स्वरूपा को परीलोक से निकालने का था लेकिन ज्योति स्वरूपा भी कहां अपनी पराजय स्वीकार करने वाली थी।

 

 

 

 

कितनी कठिनाइयों को पार करते हुए वह यहां तक पहुँच सकी है। उसने महारानी परी के ऊपर चंदन की लकड़ी की शक्ति का प्रयोग कर दिया। शक्ति का प्रयोग करते ही महारानी परी के कक्ष में बहुत प्रकार की सुंदर सुगंध फ़ैल गयी और सारा परीलोक एक ठंडक से परिपूर्ण हो गया।

 

 

 

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