सरल विवाह पद्धति इन हिंदी Pdf | Saral Vivah Paddhati In Hindi Pdf

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Saral Vivah Paddhati In Hindi Pdf Download

 

 

 

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अनुक्रम

 

  1. विवाह-सामग्री
  2. विवाह-सामग्री
  3. नम्र निवेदन एवं विवाहानुक्रमणिका
  4. नम्र निवेदन एवं विवाहानुक्रमणिका
  5. वर वरणम (वरिच्छा)
  6. वर वरणम (वरिच्छा)
  7. तिलक संस्कार
  8. तिलक संस्कार
  9. गौरी-गणेश-कलश स्थापनम्
  10. गौरी-गणेश-कलश स्थापनम्
  11. गौरी-गणेश-कलश आवाहनम्
  12. गौरी-गणेश-कलश आवाहनम्
  13. गौरी-गणेश-कलश पूजनम्
  14. गौरी-गणेश-कलश पूजनम्
  15. नवग्रह-षोडशमातृका पूजनम्
  16. नवग्रह-षोडशमातृका पूजनम्
  17. नवग्रह आवाहन एवं पूजन
  18. नवग्रह आवाहन एवं पूजन
  19. षोडशमातृका एवं नवग्रह पूजनम्
  20. षोडशमातृका एवं नवग्रह पूजनम्
  21. ब्राह्मण-वरणम्
  22. ब्राह्मण-वरणम्
  23. वर पूजनम्
  24. वर पूजनम्
  25. लगन पुजाना
  26. लगन खोलने की विधि
  27. लगन पुजाना
  28. लगन खोलने की विधि
  29. मठमँगरा (तनी कढ़ाई)
  30. मण्डप (खम्भा) स्थापनम्
  31. मठमँगरा (तनी कढ़ाई)
  32. मण्डप (खम्भा) स्थापनम्
  33. कलश-स्थापन
  34. कलश-पूजा विधि
  35. कलश-स्थापन
  36. कलश-पूजा विधि
  37. तेल
  38. तेल
  39. तेल चढ़ाने की विधि
  40. तेल चढ़ाने की विधि
  41. मंत्री पूजन
  42. मंत्री पूजन
  43. देव-पितृ-निमन्त्रण
  44. देव-पितृ-निमन्त्रण
  45. नान्दीमुख श्राद्ध
  46. नान्दीमुख श्राद्ध
  47. द्वार पूजन
  48. द्वार पूजन
  49. वर-पूजन
  50. वर-पूजन
  51. विवाह विधान प्रारम्भ
  52. विवाह विधान प्रारम्भ
  53. अथ शालामन्त्रः
  54. अथ शालामन्त्रः
  55. अग्नि स्थापन
  56. अग्नि स्थापन
  57. शाखोच्चार
  58. शाखोच्चार
  59. कन्यादान संकल्प
  60. कुशकण्डिका
  61. कन्यादान संकल्प
  62. कुशकण्डिका
  63. अन्तःपट
  64. अन्तःपट
  65. सप्तपदी
  66. सप्तपदी
  67. हृदयालम्भन
  68. हृदयालम्भन
  69. अभिषेक
  70. अभिषेक
  71. विनय पद्यावलिः
  72. विनय पद्यावलिः

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

प्रिया और पिंकी दोनों सगी बहने थी। इनके पिता का नाम रामप्यारे था। अपनी दोनों पुत्रियों की शादी करने के बाद रामप्यारे भी इस दुनिया को छोड़कर विश्राम करने चले गए। रामप्यारे की दोनों पुत्रियां अपने परिवार के साथ सुखी थी। दोनों को शादी के बाद मिले बरसो हो गए थे।

 

 

 

 

कई बरस के बाद एक रिश्तेदार के यहां दोनों बहनो की मुलाकात हो गयी। दोनों आपसी गिले सिकवे मिटाने के बाद एक दूसरे की कुशल क्षेम से अवगत हो रही थी। प्रिया ने देखा कि उसकी छोटी बहन गहनों से लदी हुई है उसका रंग कुछ खिल गया है।

 

 

 

 

स्वभाव में गरिमा झलक रही थी। वह बात चीत करने में भी पहले से निपुण हो गयी है। कीमती रेशमी साड़ी और बेलबूटे के मखमली चादर से उसका रूप चमक रहा था। प्रिया पिंकी के अतीत में खो गयी। लड़कपन में वही पिंकी सिर के बिखरे हुए बालो के साथ इधर उधर खूब घूमती थी।

 

 

 

 

फूहड़पन में उसका सानी नहीं था। अंतिम बार प्रिया ने उसे उसके विवाह में देखा था। विवाह के समय भी उसके स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था। वह सिर्फ लंबाई में ही सफलता प्राप्त कर सकी थी। उसके फूहड़पन और मंदबुद्धि में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था।

 

 

 

 

लेकिन आज तो बात ही कुछ और थी। बात-बात पर नाराज होने वाली पिंकी ने अपने इस रूप लावण्य को कहां छुपा रखा था? उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो कली खिली है। रेशमी और मखमली कपड़ो से किसी की रूप रेखा नहीं बदल सकती है।

 

 

 

 

यह सिर्फ आँखों को धोखा हो रहा है। यहां पचासो स्त्रियों का जमावड़ा है फिर वही क्यों आँखों में समायी जाती है? इसमें इतना आकर्षण ही क्यों है? कही आईना मिल जाता तब वह अपनी सूरत भी देख लेती। घर से चलते समय अपने शरीर के ऊपर जितना चमकदार सोना चढ़ा सकती थी उससे अधिक ही चढ़ा लिया था।

 

 

 

 

आइना भी देखा था लेकिन अब वह सूरत स्मृति से मिट चुकी है। केवल उसकी धुंधली सी परछाई भर हृदय में रह गयी है। पिंकी में इतना आकर्षण कहां से आया इसका पता लगाते हुए उसकी तूलना करेगी भीड़ भाड़ में वह आइना देखने की आदी नहीं है।

 

 

 

 

जबकि उसके पास भी एक छोटा सा आइना मौजूद है और मेकअप की सामाग्री भी है। यहां उपस्थित सभी औरते न जाने उसे क्या समझे। प्रिया की सोच में यहां कोई आइना होना चाहिए और ड्राइंग रूम में तो अवश्य होना चाहिए। वह ड्राइंग रूम में चली गयी और वहां आदमकद में शीशे में अपनी सूरत देखने लगी।

 

 

 

 

इस समय सभी लोग सहन में थे यहां कोई नहीं था। सभी औरते गाने बजाने में व्यस्त थी। रूपकुमारी आदमकद शीशे के सामने खुद को देखते हुए अपनी छोटी बहन पिंकी से अपनी तूलना करने लगी। वह अपने एक-एक अंग और अंग विन्यास को देखते हुए खुद से बोली – उसकी छवि और वह स्वयं निष्कलंक है।

 

 

 

 

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