सर्प सत्र राज कॉमिक्स | Sarp Satra Raj Comics pdf Free download

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Sarp Satra Raj Comics pdf

 

 

 

 

 

 

 

Sarp Satra Raj Comics pdf

 

 

कंचन वन में सभी पशु पक्षी आपस में मिलकर रहते थे। उनका जीवन आनंदमय था। कंचन वन में फलदार वृक्ष और हरी-हरी घास बहुत मात्रा में थी। जंगल के बीच में एक नदी बहती थी उसमे सदैव जल भरा रहता था। जंगल के सभी पशु पक्षियो को पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध था।

 

 

 

कंचन वन में एक बहुत ही दुर्लभ पक्षी का जोड़ा रहता था। उन दोनों पक्षियों का रंग सुनहरा था। जब कभी वह दोनों पक्षी मस्ती में गाना गाते थे तब उनके पंख का दो चार टुकड़ा जमीन पर अवश्य ही गिरता था। जमीन पर गिरते ही पंख के टुकड़े सोने के रूप में बदल जाते थे।

 

 

 

कभी किसी भूले भटके शिकारी के हाथ लग जाते थे तब उसकी किस्मत ही बदल जाती थी। एक रोज कालू नामक शिकारी पक्षियों को पकड़ने के लिए गया। सुनहरे पक्षी का वह जोड़ा एक घने वृक्ष पर बैठा हुआ था। दोपहर की गर्मी पड़ रही थी कालू गर्मी से परेशान था अतः घना वृक्ष देखकर उसके नीचे आराम करने के लिए लेट गया।

 

 

 

वह सुनहरे पक्षियों का जोड़ा मस्ती में गीत गाने लगे तभी चार पंख निकलकर जमीन पर गिर गए और गिरते ही सोने में बदल गए। कालू शिकारी की आँख खुली तो देखा उसके बगल में सोने के पंख गिरे हुए है। उसने सोचा कही मेरी आँखे धोखा तो नहीं खा रही है।

 

 

 

उसने आँख को मलते हुए पंख को उठाया तो वह सचमुच सोने के थे। कालू शिकारी के मन में लालच आ गया। वह सोचने लगा यदि मैं इन दोनों सुनहरे पक्षियों को पकड़ लूंगा तो हमे बहुत सारे सुनहरे पंख मिल जायेंगे और हमारी गरीबी दूर हो जाएगी। जिस डाल पर दोनों सुनहरे पक्षी बैठे थे कालू ने उस पर जाल फेक दिया।

 

 

 

मादा पक्षी चौकन्ना थी लेकिन नर पक्षी जाल में फंस गया। कालू खुश हो गया और अपने मन में बोला – चलो आज एक तो मिल गया दूसरे को किसी और दिन पकड़ लेंगे। कालू शिकारी नर पक्षी को लेकर एक पिंजड़े में बंद कर दिया फिर अपने घर की तरफ लौटने लगा। मादा सुनहरा पक्षही परेशान हो गयी थी।

 

 

 

तभी उसे भरा सियार दिखाई पड़ा। मादा पक्षी बोली – भूरा भाई! हमारे साथी को यह शिकारी पकड़ कर ले जा रहा है आप हमारी सहायता करो। कंचन वन की इज्जत का सवाल सोचकर भूरा सियार सुनहरे पक्षी की सहायता के लिए तैयार हो गया। भूरा सियार अचानक से कालू शिकारी के पास आकर उसके साथ-साथ चलने लगा।

 

 

 

कालू को लगा शायद आज किस्मत उसके ऊपर मेहरबान है तबभी यह सियार उसके साथ चल रहा है। भूरा सियार बोला – कालू भाई! आप इस पक्षी को छोड़ दो और मुझे अपने साथ ले चलो। कालू शिकारी बोला – मैं तुम्हारी बातो में आने वाला नहीं हूँ मैं इसे नहीं छोड़ सकता।

 

 

 

भूरा ने अपनी दाल गलती नहीं देखकर फिर कालू से बोला – अच्छा यह तो बताओ कि इस पक्षी को कैसे अपने जाल में फंसाकर पकड़ लिए। कालू बोला – पेड़ की डाल पर जाल फेककर इसे फंसा लिया। भूरा सियार बोला – कहकर नहीं करके दिखाओ तब मैनब तुम्हारी बात मान जाऊंगा फिर इस पक्षी को छोड़ने के लिए नहीं कहूंगा।

 

 

 

कालू शिकारी एक पेड़ की तरफ देखकर बोला – चलो वहां करके दिखाता हूँ। कालू  पेड़ के पास गया जिस पिंजड़े में सुनहरा पक्षी बंद था उसे जमीन पर रख दिया फिर अपने कंधे से जाल उतारकर पेड़ की डाल पर फेक लगा इतना समय भूरा सियार के लिए पर्याप्त था।

 

 

 

उसने झट से पिंजड़े का ढ़क्कन खोल दिया सुनहरा पक्षी पिंजड़े से आजाद होकर अपने साथी के पास चला गया। कालू ने पीछे मुड़कर देखा तो पिंजड़े का ढक्कन खुला हुआ था और सुनहरा पक्षी आजाद हो गया था जबकि भूरा सियार दूर खड़ा होकर शिकारी को चिढ़ाने के अंदाज में सैल्यूट कर रहा था।

 

 

 

दोनों सुनहरे पक्षी फिर मस्ती में गाना गाने लगे। इसबार आठ सुनहरे पक्षी गिरे बहेलिया उन सोने के पंख को लेकर खिसियाते हुए लौट गया।

 

 

 

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