Best Shabar Mantra in Hindi Pdf Free / शाबर मंत्र Pdf

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Shabar Mantra in Hindi Pdf Free 

 

 

 

पुस्तक का नाम  Shabar Mantra in Hindi Pdf Free
श्रेणी  ज्योतिष, साधना, तंत्र – मंत्र 
भाषा  हिंदी 
फॉर्मेट  Pdf
साइज  670 MB
पृष्ठ  643

 

 

 

Shabar Mantra in Hindi Pdf Free
शाबर मंत्र Pdf Download

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

जिनके सुख के लिए सबको सुख देने वाले कल्याण रूप त्रिपुरारी शिव जी ने अशुभ वेश धारण किया उस सुख में अवधपुरी के नर-नारी निरंतर निमग्न रहते है। उस सुख का लवलेश मात्र जिन्होंने एक बार स्वप्न में भी प्राप्त कर लिया। हे पक्षीराज! वह सुंदर बुद्धि वाले सज्जन पुरुष उसके सामने ब्रह्म सुख को भी प्राप्त कर लिया।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

मैं और कुछ समय तक अवधपुरी में रहा और मैंने श्री राम जी की रसीली बाल लीलाये देखी। श्री राम जी की कृपा से मुझे भक्ति का वरदान प्राप्त हुआ।

 

 

 

तदनन्तर प्रभु के चरणों की वंदना करके मैं अपने आश्रम पर लौट आया। इस प्रकार जब से श्री राम जी ने मुझको अपनाया तब से मुझे कभी माया नहीं व्यापी।

 

 

 

श्री हरि की माया ने जैसे मुझको नचाया वह सब गुप्त चरित्र मैंने कहा। हे पक्षीराज गरुण! अब मैं आपसे अपना निजी अनुभव कहता हूँ कि भगवान के भजन के बिना क्लेश दूर नहीं होते।

 

 

 

हे पक्षीराज! सुनिए, श्री राम जी की कृपा के बिना श्री राम जी की प्रभुता कोई नहीं जान सकता है। प्रभुता जाने बिना उनपर विश्वास नहीं जामता विश्वास के बिना प्रीति नहीं होती और प्रीति के बिना भक्ति वैसे ही दृढ नहीं होती जैसे पक्षीराज! जल की चिकनाई नहीं ठहरती।

 

 

 

दोहा का अर्थ-

 

 

गुरु के बिना ज्ञान नहीं हो सकता है? वैराग्य के बिना कही ज्ञान हो सकता है? इसी तरह वेद और पुराण कहते है कि श्री हरि की भक्ति के बिना क्या सुख मिल सकता है? हे तात! स्वाभाविक, संतोष के बिना क्या किसी को शांति मिलती है? चाहे कोटि उपाय करके मरिये क्या फिर भी जल के बिना नाव चल सकती है?

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

संतोष के बिना काम का नाश नहीं होता है और कामनाओ के रहते स्वप्न में भी सुख नहीं हो सकता है और श्री राम जी के भजन के बिना कामनाओ का अंत क्या होता है? बिना धरती के भी कही वृक्ष उग सकता है? तत्वज्ञान के बिना क्या समभाव आ सकता है? श्रद्धा के बिना धर्म का आचरण नहीं होता है क्या पृथ्वी तत्व के बिना किसी को गंध प्राप्त कर सकती है?

 

 

 

तप के बिना क्या तेज फैल सकता है? जल तत्व के बिना संसार में क्या रस हो सकता है? पंडित जनो की सेवा के बिना क्या शील, सदाचार प्राप्त हो सकता है? हे गोसाई! जैसे बिना तेज के रूप नहीं मिलता।

 

 

 

निज सुख (आत्मानंद) के बिना क्या मन स्थिर हो सकता है? वायु तत्व के बिना क्या स्पर्श हो सकता है? क्या विश्वास के बिना भी कोई सिद्धि हो सकती है? इसी प्रकार श्री हरि के भजन के बिना जन्म-मृत्यु के भय का नाश नहीं हो सकता है।

 

 

 

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