शक्तिमान कॉमिक्स Pdf | Shaktimaan Comics pdf Hindi

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Shaktimaan Comics pdf

 

 

 

 

 

 

 

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डा.निशा भारती ,विपिन ,कोमल ,सरिता  ,रोशन इन सबकी जिंदगी बहुत ही खुशहाल थी। जो लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूसरों की मदद करते हैं तो भगवान की कृपा उनके ऊपर सदैव बनी रहती है। सरिता और रोशन दोनों ही बड़े हो गए थे ,और पढ़ने जाते थे उन्हें रोज जो पैसा खर्च के लिए मिलता था ,दोनों ही उसे आभाव ग्रस्त विद्यार्थिओं में वांट देते थे। उनके इस अच्छे कार्य से कई मित्र बन गए थे।

 

 

 

 

 

सरिता की एक सहेली थी ,उसका नाम अंजलि था। अंजलि चित्र बहुत सुंदर बनाती थी उसके बनाये हुए चित्र इतने सुंदर होते थे मानो अभी बोल पड़ेंगे। एक बार चित्र बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन होना था ,लेकिन अंजलि स्कूल से छुट्टी होने पर स्कूल में ही गिर पड़ी ,उसके दाहिने हाथ में मोच आ गई थी लेकिन सरिता ने तुरंत उसकी सहायता किया ,क्यों कि ? एक डा. की लड़की होने के नाते वह अपने स्कूल बैग में प्राथमिक उपचार की सब सामान साथ में रखती थी ,और सरिता के प्रयास से वह दो दिन में ठीक हो गई थी।

 

 

 

 

तीसरे दिन चित्रकला की प्रतियोगिता शुरू हुई थी ,सभी चित्रकला के छात्र -छात्राएं अपनी रूचि के अनुसार ही चित्र बना रहे थे ,लेकिन अंजलि ने उस दुर्घटना को ही ( जब वह घायल हो गई थी ) चित्रकला के माध्यम से उतार दिया था। चित्र में एक बालिका दूसरी को उठा कर उसके घायल हुए हाथ पर मरहम पट्टी करते हुए दिख रही थी ,और यह चित्र सभी को प्रभावित कर रहा था। निर्णायक मंडल ने उस चित्र को प्रथम स्थान दिया था। अंजलि अपना बनाया हुआ यह चित्र सरिता को समर्पित कर दिया था।

 

 

 

विपिन भारती रोज सुबह दस नौजवानो को सेना में भर्ती होने के गुण सिखाते थे उनके सिखाये हुए चार नवयुवक एक दिन सुबह उनके पास पहुंच गए ,फिर नमस्कार करने लगे ,विपिन ने पूछा ,आप लोग कौन हैं ?तब वह सभी नवयुवक बोले -सर आपके सिखाये हुए प्रयास से ही हम लोग सेना की भर्ती में सफल हो गए और सेना की नौकरी भी कर रहें हैं। आपसे मिलने की इच्छा ही हम लोंगो को यहाँ तक खीच लायी ,हमलोग आपकी सेवा करना चाहते हैं। वह चारों नवयुवक एक साथ ही बोले। विपिन भारती ने  उनसे कहा -आप लोग भी अन्य युवकों का मार्ग दर्शन करके उन्हें सेना में भर्ती योग्य बनाओ यही हमारी सेवा होगी। वह सभी नवयुवक चले गए।

 

 

 

 

रोशन और सरिता अब समय  के साथ ही अब दसवीं कक्षा के विद्यार्थी थे। शनिवार का दिन था सभी छात्रों की सुट्टी हो गई थी अंजलि जो सरिता की सहेली थी ,उसने रोशन और सरिता को अपने घर पर रविवार के दिन भोजन के लिए आमंत्रित किया था। सरिता ने यह बात डा. निशा भारती को बताया और रोशन को लेकर अंजली के घर चली गई। अंजली का घर आगरा से थोड़ी दूर पर एक विकसित गांव में था आगरा के नजदीक होने से अंजली के गांव में शहर जैसी सुविधा थी। रोशन और सरिता शहर के रहने वाले थे लेकिन आज गांव को देख कर  बहुत खुश थे।

 

 

 

सरिता रोशन और अंजली तीनो भोजन करने बैठे और आपस में बातें करते हुए भोजन करने लगे उन्हें गांव के भोजन  में बहुत आनंद प्राप्त हो रहा था ,इतना स्वादिष्ट भोजन शहर में कहाँ मिलता है।

 

 

 

 

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