शरद पूर्णिमा व्रत कथा Pdf | Sharad Purnima Vrat katha Hindi Pdf

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Sharad Purnima Vrat Katha Hindi Pdf

 

 

 

 

 

 

 

 

Sharad Purnima Vrat katha Hindi Pdf

 

 

शरद पूर्णिमा का महत्व

 

 

 

1- शरद पूर्णिमा का व्रत रखने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है।

2- इस शरद पूर्णिमा को अधिकांश घरो में खीर बनाकर चंद्रदेव मां लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है।

3- शरद पूर्णिमा को ही माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन उनकी पूजा करने से वह प्रसन्न होती है।

4- पूरे मनोयोग से शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

5- मान्यताओं के साथ शरद पूर्णिमा राधा कृष्ण और गोपियों के रासलीला का दिन भी है।

 

 

हिन्दू शास्त्र के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरुण पर आसीन होकर पृथ्वी लोक का भ्रमण करती है। शरद पूर्णिमा का व्रत प्रति वर्ष शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन आयोजन होता है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थी।

 

 

 

 

इस पूर्णिमा के विषय में विषय में अनेक पौराणिक कथाये प्राप्त होती है। एक कथा के अनुसार द्वापर युग में श्री कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ जब रासलीला किया था उस समय भी शरद ऋतु की पूर्णिमा थी। इसलिए शरद पूर्णिमा का महत्व अत्यधिक रूप से बढ़ जाता है।

 

 

 

शरद पूर्णिमा व्रत कथा Pdf

 

 

 

 

शरद पूर्णिमा की कथा इस प्रकार है – प्राचीन समय में एक नगर में उज्वल नाम का एक धनवान सेठ रहता था। उसकी दो कन्या थी एक कन्या का नाम नयना था दूसरी कन्या का नाम मयना था। दोनों कन्या धार्मिक प्रवृत्ति की थी तथा दोनों ही पूर्णिमा का व्रत किया करती थी।

 

 

 

सेठ की बड़ी कन्या नयना इस व्रत को पूरी आस्था और तन्मयता के साथ करती थी इसके विपरीत सेठ की दूसरी कन्या मयना इसी व्रत को उतावली होकर करती थी। फलस्वरूप उसका शरद पूर्णिमा का व्रत अधूरा रह जाता था। इसका परिणाम यह होता था कि मयना के घर में बार-बार कन्या का जन्म होता लेकिन वह जीवित नहीं रहती थी।

 

 

 

मयना बहुत दुखी रहने लगी। वह इस पीड़ा के निवारण के लिए एक विद्वान के गयी और उनसे इस दुःख के निवारण का उपाय पूछा। पंडित जी ने कहा – तुम शरद पूर्णिमा का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करो जिससे तुम्हे सुखद परिणाम प्राप्त होगा।

 

 

 

मयना ने पंडित जी के कथनानुसार पूरी श्रद्धा से शरद पूर्णिमा का व्रत किया फलतः उसके घर में पुत्र का जन्म हुआ पर वह भी कुछ समय बाद काल कलवित हो गया। तब मयना ने बालक के मृतक शरीर को एक छोटी सी चौकी पर लिटाकर उसे एक कपड़े से ढक दिया।

 

 

 

मयना ने अपनी बहन नयना को बुलावा भेज दिया। नयना अपनी बहन मयना के घर आयी। तब मयना ने अपनी बड़ी बहन को उसी चौकी पर बैठने के लिए कहा जिस चौकी पर मृतक बालक का शरीर रखकर ढक दिया था। नयना उस चौकी पर बैठने ही वाली थी कि चौक गयी और बोली – मयना! तूने ऐसा क्यों किया?

 

 

 

अगर मैं इस चौकी पर अभी बैठ जाती तब इस बालक की जीवन लीला ही समाप्त हो जाती। मयना का पुत्र नयना के स्पर्श मात्र से ही जीवित हो उठा था कारण कि नयना शरद पूर्णिमा का व्रत रखती थी और पुण्यवान थी। मयना बोली – बहन! तेरे ही पुण्य के प्रताप से मेरा पुत्र जीवित हो गया। इसके पहले वह मृतक हो चुका था। उसके बाद से सारे नगरवासी शरद पूर्णिमा का व्रत करने लगे।

 

 

 

 

शरद पूर्णिमा व्रत कथा Pdf Download

 

 

 

 

पुस्तक का नाम  शरद पूर्णिमा व्रत कथा Pdf
भाषा  हिंदी 
साइज  0.60 Mb 
पृष्ठ  4
श्रेणी  धार्मिक 

 

 

 

 

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