Shree Suktam Path in Hindi Pdf / श्री सूक्त Pdf

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

सुबह हो गयी थी। मिलन नींद से जाग उठा उसके आस-पास सब कुछ सामान्य था। वह शीशे के दरवाजे के पास गया और धक्का देने का प्रयास करने लगा। मिलन के थोड़े प्रयास से ही शीशे का दरवाजा स्वतः खुल गया। मिलन के उस दरवाजे में प्रवेश करते ही दरवाजा स्वतः बंद हो गया।

 

 

 

 

अब मिलन के लिए उस दरवाजे से पीछे लौटना मुश्किल था। वह आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा था तो उसकी निगाह बायीं तरफ गयी। एक बड़ी चट्टान पर लिखा हुआ था – यहां सैकड़ो वर्ष के बाद जो मनुष्य आएगा उसका नाम राम मिलन होगा।

 

 

 

 

उसे प्रयास करते हुए अपनी दाहिनी तरफ मुड़ जाना चाहिए तभी परी को ढूंढने का प्रयास सफल होगा मिलन वह सब पढ़कर अपनी दाहिनी तरफ मुड़ गया वह शीशे का दरवाजा समाप्त हो चुका था फि भी मिलन के लिए निकलना किसी प्रकार से संभव नहीं था।

 

 

 

 

मिलन अपने दाहिनी तरफ बढ़ा तो उसे एक नदी मिली उस नदी का प्रवाह अत्यंत तीव्र था। नदी के समीप मिलन के जाते ही नदी का पानी स्वतः वर्फ मे बदल गया। मिलन सोचने लगा यहां उसके आते ही नदी का पानी वर्फ कैसे और क्यों बदल गया?

 

 

 

 

मिलन के पास प्रबोध महाराज का दिया हुआ पत्थर का वह कछुआ मिलन के ऊपर किसी भी आकस्मिक खतरे को तुरंत ही विफल करता था। मिलन उस वर्फीली नदी के किनारे खड़ा होकर नदी में जमी हुई वर्फ को देख रहा था। उसी समय न जाने कहां से बहुत भयानक पक्षी आसमान में गोल चक्कर काटने लगा।

 

 

 

 

उस भयानक पक्षी के पंजे बहुत विशाल थे। उसकी चोंच नुकीली और तेज थी। उस भयानक पक्षी के आने से तीव्र हवा का झोंका आया। उस तीव्र हवा के झोंके से मिलन गिरते-गिरते बच गया। गोल चक्कर में घूमते हुए वह भयानक पक्षी मिलन के ऊपर झपट पड़ा।

 

 

 

 

मिलन को समझने का मौका दिए बिना उसे अपने चोंच और पंजे में दबाकर दक्षिण दिशा की तरफ जाने लगा। मिलन की जेब में पड़ा हुआ वह सिद्ध कछुआ अब  वृहद आकार में आ गया था। कछुआ उस भयानक पक्षी के एक पंजे को अपने मुंह से पकड़ने के बाद उस भयानक पक्षी से कई गुना वृहद आकार ग्रहण करने के बाद हवा में झूल गया।

 

 

 

 

अचानक आयी हुई इस विपत्ति से वह भयानक पक्षी दर्द से पीड़ित हो उठा और कछुआ से पूछा – तुम इतने विशाल जीव कौन हो? कछुआ बोला – पहले तुम हमारे प्रश्नो का उत्तर दो। तुम कौन हो और किसके पास हमारे मालिक को लेकर कहाँ जा रहे हो?

 

 

 

वह भयानक पक्षी बोला – मैं हारु नामक शक्तिशाली दैत्य का अनुचर हूँ उसके कहने पर ही मैं तुम्हारे मालिक को यहां से एक योजन दूर मंदक नामक पहाड़ी पर ले जा रहा हूँ। हमारे मालिक हारु को अपने क्षेत्र में किसी का आना बर्दाश्त नहीं है।

 

 

 

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