Siddh Mantra Sangrah Pdf / सिद्ध मंत्र संग्रह Pdf

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

विशेषतः कलियुग में कर्म से ही फल की सिद्धि होती है। अपने-अपने अधिकार के अनुसार ऊपर कहे गए किसी भी कर्म द्वारा शिवाराधन करने वाला पुरुष यदि सदाचारी है और पाप से डरता है तो वह उन-उन कर्मो का पूरा-पूरा फल अवश्य प्राप्त कर लेता है।

 

 

 

 

ऋषियों ने कहा – सूत जी! पुण्य क्षेत्र कौन-कौन से है जिनका आश्रय लेकर सभी स्त्री पुरुष शिव पद प्राप्त कर ले यह हमे संक्षेप से बताइये। सूत जी बोले – विद्वान एवं बुद्धिमान महर्षियो! मोक्षदायक शिव क्षेत्रो का वर्णन सुनो। तत्पश्चात मैं लोक रक्षा के लिए शिव संबंधी आगमो का वर्णन करूँगा।

 

 

 

 

पर्वत, वन और काननों सहित इस पृथ्वी का विस्तार पचास करोड़ योजन है। भगवान शंकर की आज्ञा से पृथ्वी सम्पूर्ण जगत को धारण करके स्थित है। भगवान शंकर ने धरती पर विभिन्न स्थानों में वहां-वहां के निवासियों को कृपापूर्वक मोक्ष देने के लिए शिव क्षेत्र का निर्माण किया है।

 

 

 

 

कुछ ऐसे क्षेत्र है जिन्हे देवताओ तथा ऋषियों ने अपना वासस्थान बनाकर अनुगृहीत किया है। इसीलिए उनमे तीर्थत्व प्रकट हो गया है तथा अन्य बहुत से तीर्थ क्षेत्र ऐसे है जो लोको की रक्षा के लिए स्वयं प्रादुर्भूत हुए है। तीर्थ और क्षेत्र में जाने पर मनुष्य को हमेशा स्नान दान और जप आदि करना चाहिए।

 

 

 

 

अन्यथा वह रोग दरिद्रता तथा मूकता आदि दोषो का भागी होता है। जो मनुष्य इस भारत वर्ष के भीतर मृत्यु को प्राप्त होता है वह अपने पुण्य की फल से ब्रह्मलोक में वास करके पुण्यक्ष के पश्चात् पुनः मनुष्य योनि में ही जन्म लेता है। ब्राह्मणो! पुण्यक्षेत्र में पाप कर्म किया जाय तो वह और भी दृढ हो जाता है।

 

 

 

 

अतः पुण्य क्षेत्र में निवास करते समय सूक्ष्म से सूक्ष्म अथवा थोड़ा सा भी पाप न करे। सिंधु और शतद्रू नदी के किनारे बहुत से पुण्य क्षेत्र है। सरस्वती नदी परम पवित्र और साथ मुख वाली कही गयी है अर्थात उसकी साथ धाराएं है। विद्वान पुरुष सरस्वती के उन-उन धाराओं के किनारे निवास करे तो वह क्रमशः ब्रह्मपद को पा लेता है।

 

 

 

 

हिमालय पर्वत से निकली हुई पुण्य सलिला गंगा सौ मुख वाली नदी है। उसके किनारे काशी-प्रयाग आदि अनेक पुण्य क्षेत्र है। वहां मकर राशि के सूर्य होने पर गंगा की तट भूमि पहले से भी अधिक प्रशस्त एवं पुण्यदायक हो जाती है। शोणभद्र नद की दस धाराये है वह वृहस्पति के मकर राशि में आने पर अत्यंत पवित्र तथा अभीष्ट फल देने वाला हो जाता है।

 

 

 

 

उस समय वहां स्राव और उपवास करने से विनायक पद की प्राप्ति होती है। पुण्य सलिला महानदी नर्मदा के चौबीस मुख है। उसमे स्नान तथा उसके किनारे निवास करने से मनुष्य को वैष्णव पद की प्राप्ति होती है। तमसा के बारह तथा रेवा के दस मुख है।

 

 

 

 

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