Vishnu Bhav Nadi Jyotish Pdf / विष्णु भाव नाड़ी ज्योतिष Pdf

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Vishnu Bhav Nadi Jyotish Pdf / विष्णु भाव नाड़ी ज्योतिष पीडीएफ

 

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

बहुत से राम लक्ष्मण देखकर वानर-भालू मिथ्या डर से मन में बहुत ही डर गए। लक्ष्मण जी सहित वह मानो चित्र लिखित से जहां-तहां खड़े देखने लगे। अपनी सेना को आश्चर्य से भरा देखकर कोशलपति भगवान हरि ने हंसकर धनु चलाकर पलभर में सारी माया हर लिया। वानरों की सारी सेना हर्षित हो गयी।

 

 

 

 

89- दोहा का अर्थ-

 

 

 

फिर श्री राम जी सबकी ओर देखकर गंभीर वचन बोले – हे वीरो! तुम सब अब बहुत थक गए हो, इसलिए अब मेरा और रावण का द्वन्द युद्ध देखो।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

ऐसा कहकर श्री रघुनाथ जी ने ब्राह्मणो के चरण कमल में सिर नवाया फिर रथ चलाया। तब रावण के हृदय में क्रोध छा गया और वह गरजता हुआ सामने दौड़ा।

 

 

 

 

उसने कहा – अरे तपस्वी! सुनो, तुमने युद्ध में जिन योद्धाओ को जीता है मैं उनके समान नहीं हूँ। मेरा नाम रावण है मेरा यश सारा जगत जानता है। लोकपाल तक जिसके कैद में पड़े है।

 

 

 

 

तुमने खर, दूषण और विराध का अंत किया। बेचारे बालि को व्याधि की तरह समाप्त किया। बड़े-बड़े राक्षस योद्धा के समूह का संहार किया और कुम्भकर्ण तथा मेघनाद का अंत किया।

 

 

 

 

अरे राजा! यदि तुम रण से भाग न गए तो आज मैं वह सारा बैर निकाल लूंगा। आज मैं तुम्हे निश्चय ही काल के हवाले कर दूंगा। तुम कठिन रावण के पाले पड़े हो।

 

 

 

 

रावण के दुर्वचन सुनकर उसे काल के वश जानकर कृपानिधान श्री राम जी ने यह वचन कहा – तुम्हारी सारी प्रभुता जैसा तुम कहते हो बिलकुल सत्य है पर अब व्यर्थ की बकवाद न करो अपना पुरुषार्थ दिखलाओ।

 

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

व्यर्थ की बकवाद करके अपने सुंदर यश का नाश न करो। क्षमा करना तुम्हे नीति सुनाता हूँ सुनो! संसार में तीन प्रकार के पुरुष होते है – पाटल (गुलाब) आम और कटहल के समान।

 

 

 

 

एक फूल देते है, एक फूल और फल दोनों देते है और एक में केवल फल ही लगते है। इसी प्रकार पुरुषो में एक करते है कहते नहीं, दूसरे कहते और कहते भी है, तीसरे केवल करते है पर वाणी से कहते नहीं है।

 

 

 

 

90- दोहा का अर्थ-

 

 

 

श्री राम जी के वचन सुनकर वह खूब हंसा और बोला – मुझे ज्ञान सिखाते हो? उस समय बैर करते नहीं डरे अब प्राण प्यारे लग रहे है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

दुर्वचन कहते हुए रावण क्रुद्ध होकर अनेक प्रकार दिशा, विदिशा, आकाश और पृथ्वी पर सब जगह छा गये। श्री रघुवीर ने हुतासन छोड़ा जिससे रावण के सब क्षण मात्र में नष्ट हो गए। तब उसने खिसियाते हुए तीक्ष्ण शक्ति चलाई किन्तु श्री राम जी ने उसको वापस भेज दिया।

 

 

 

वह कोटि शक्ति चलाता है परन्तु प्रभु ने उन्हें बिना परिश्रम के ही हटा देते है। रावण इस प्रकार से निष्फल होते है जैसे बुरे मनुष्य के सब मनोरथ।

 

 

 

तब उसने श्री राम जी के सारथी को मारा। वह श्री राम जी की जय पुकार कर पृथ्वी पर गिर पड़ा। श्री राम जी ने कृपा करके सारथी को उठाया तब प्रभु अत्यंत क्रोध को प्राप्त हुए।

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

युद्ध में शत्रु के विरुद्ध श्री राम जी क्रोधित हुए। उनके धनु का अत्यंत भयंकर शब्द सुनकर सब राक्षस अत्यंत भयभीत हो गए। मंदोदरी का हृदय कांप उठा, समुद्र, कच्छप, पृथ्वी और पर्वत सब डर गए। दिशाओ के हाथी पृथ्वी को दांतो से पकड़कर चिंघाड़ने लगे। यह कौतुक देखकर देवता हँसे।

 

 

 

 

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