Best No1 विष्णु पुराण Pdf Book / Vishnu Puran Pdf in Hindi

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Vishnu Puran Pdf in Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Vishnu Puran Pdf in Hindi Download कर सकते हैं और आप यहां से  शिव पुराण Pdf Free Download कर सकते हैं।

 

 

 

Vishnu Puran Pdf in Hindi Gita Press

 

 

 

पुस्तक के लेखक  गीता प्रेस 
पुस्तक का नाम  विष्णु पुराण 
भाषा  हिंदी 
श्रेणी  धार्मिक 
फॉर्मेट  Pdf
पृष्ठ  11 Mb
साइज  558

 

 

 

 

 

 

 

 

विष्णु पुराण पीडीऍफ़ डाउनलोड 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें newsbyabhi247@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

विष्णु पुराण के बारे में Vishnu Puran Pdf in Hindi Free

 

 

 

Vishnu Puran Pdf in Hindi
Vishnu Puran Pdf in Hindi

 

 

 

विष्णु पुराण का आकार सबसे छोटा है। विष्णु पुराण में भगवान विष्णु के चरित्र का विस्तृत वर्णन है और इसकी रचना करने वाले वेदव्यास जी के पिता पराशर जी है। इस पुराण में भूमंडल का स्वरूप, ज्योतिष, राजवंशो का इतिहास, कृष्ण चरित्र आदि विषयो को बहुत ही तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें हिन्दू आध्यात्मिकता की सरल और सुबोध शैली प्राप्त होती है।

 

 

 

 

विष्णु पुराण के श्लोको की संख्या (सात हजार)

 

 

 

 

विष्णु पुराण में इस समय सात हजार श्लोक उपलब्ध है। यह पुराण छः भागो में विभक्त है।

 

 

1- पहले भाग में शृष्टि अथवा सर्ग की उत्पत्ति, काल का स्वरूप, ध्रुव, पृथु आदि की कथाये दी गई है। वैसे कई ग्रंथो में इसके श्लोको की संख्या तेईस हजार बताई जाती है।

2- विष्णु पुराण के दूसरे भाग में लोक का स्वरूप, पृथ्वी के नौ खंड, ग्रह नक्षत्र आदि का वर्णन है।

3- तीसरे भाग में वेद की शाखाओ का विस्तार, मन्वन्तर, गृहस्थ धर्म के साथ ही श्राद्ध विधि आदि का वर्णन किया गया है।

4- चौथे भाग में सूर्य वंश और चंद्र वंश के राजागण और उनकी वंशावलियों का वर्णन किया गया है।

5- पांचवे भाग में कृष्ण का चरित्र और उनकी अनेको लीला का वर्णन है।

6- छठे भाग में प्रलय तथा मोक्ष का उल्लेख है।

 

 

 

विष्णु पुराण में कृष्ण के चरित्र और उनकी अनेको लीला का वर्णन

 

 

 

 

विष्णु पुराण में मुख्य रूप से कृष्ण चरित्र का वर्णन है। श्री कृष्ण ने प्रजा को संगठन शक्ति का महत्व समझाया और अन्याय का प्रतिकार करने की प्रेरणा दिया।

 

 

 

अधर्म के विरुद्ध धर्म का परचम लहराया। विष्णु पुराण में कृष्ण के चरित्र के साथ ही भक्ति और वेदांत के उत्तम सिद्धांतो का भी प्रतिपादन हुआ है। यहां आत्मा को जन्म-मृत्यु से रहित, निगुण और अनंत बताया गया है।

 

 

 

 

विष्णु पुराण में राज वंशावलियों पर प्रकाश

 

 

 

 

इस विष्णु पुराण में प्राचीन काल के राजवंशो के ऊपर प्रकाश डालते हुए कलयुगी राजाओ को चेतावनी दी गई है कि सदाचार से ही प्रजा का मन जीता जा सकता है, पापमय आचरण से नहीं। राजा का धर्म प्रजा का हित साधन और रक्षा करना होता है। जो राजा अपने प्रजा जन की उपेक्षा करता है उसका विनाश समय से पूर्ण हो जाता है।

 

 

 

 

विष्णु पुराण में आध्यात्मिकता पर प्रकाश

 

 

 

 

जो मनुष्य माया मोह के जाल से मुक्त होकर अपने कर्तव्य का पालन करता है उसे ही इस जीवनकाल का लाभ प्राप्त होता है। विष्णु पुराण के अंतिम तीन अध्यायों में आध्यात्मिक चर्चा करते हुए त्रिविध ताप, परमार्थ और ब्रह्म योग का ज्ञान कराया जाता है। मानव जीवन को श्रेष्ठ माना गया है। इसके लिए देवता भी लालायित रहते है। निष्काम और ज्ञान मार्ग का उपदेश भी इस पुराण में दिया गया है।

 

 

 

विष्णु पुराण के श्रवण से फल प्राप्ति

 

 

 

विष्णु पुराण वेद तुल्य है तथा सभी वर्ण के लोग इसका श्रवण कर सकते है। जो व्यक्ति भगवान विष्णु के चरणों में मन लगाकर विष्णु पुराण का श्रवण करते है उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते है। इस श्रेष्ठ पुराण को सुनने पर मनुष्य आयु, कीर्ति, धन, धर्म तथा विद्या की प्राप्ति करता है।

 

 

विष्णु पुराण कराने के नियम

 

 

 

विष्णु पुराण का श्रोता और वक्ता ‘यजमान और ब्राह्मण’ दोनों को ही सात दिनों तक उपवास रखना चाहिए तथा संध्या वंदन के साथ ही गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए और विष्णु पुराण का वक्ता ब्राह्मण विद्वान होना चाहिए। इस प्रकार विष्णु पुराण का श्रवण करने से मानव अपना कल्याण कर सकता है।

 

 

 

विष्णु पुराण का आयोजन स्थल

 

 

 

 

जिस स्थान पर विष्णु पुराण का श्री गणेश करना हो वह स्थान उत्तम तथा पवित्र होना चाहिए, अपने जन्म भूमि में विष्णु पुराण करवाने का विशेष महत्व बताया गया है। फिर भी जहां मन को संतोष पहुंचे उसी स्थान पर कथा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

 

 

 

विष्णु पुराण करवाने का मुहूर्त

 

 

 

विष्णु पुराण का श्री गणेश कराने के लिए श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, अगहन, माघ, फाल्गुन और ज्येष्ठ मास विशेष शुभ है। लेकिन विद्वान ब्राह्मणो से मुहूर्त निकलवाने के साथ ही विष्णु पुराण की कथा का जब भी श्री गणेश हो जाय वही पल वही क्षण शुभ मुहूर्त है ऐसा विद्वान लोगो का मत है।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

प्रभु श्री राम जी और सीता जी और लक्ष्मण जी ने बहुत प्रकार से आग्रह किया, पर केवट ने कुछ नहीं लिया। तब करुणा के धाम भगवान श्री राम जी ने उसे निर्मल भक्ति वरदान देकर विदा किया।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- तब रघुकुल के स्वामी श्री राम जी ने स्नान करके शिव की पूजा किया और सिर नवाया। सीता जी हाथ जोड़कर गंगा जी से कहा – हे माता! मेरा मनोरथ पूरा करिये।

 

 

 

2- जिससे मैं पति और देवर के साथ कुशल पूर्वक लौट आऊं और तुम्हारी पूजा करू। तब सीता जी की प्रेम रस में सनी हुई विनती सुनकर तब गंगा जी के निर्मल जल में से श्रेष्ठ वाणी हुई।

 

 

 

3- हे रघुवीर की प्रियतमा जानकी! सुनो, तुम्हारा प्रभाव जगत मे सबको मालूम है। तुम्हारी कृपा दृष्टि से देखते ही लोग लोकपाल हो जाते है। सब सिद्धियां हाथ जोड़कर तुम्हारी सेवा करती है।

 

 

 

4- तुमने जो हमे बड़ी विनय सुनाई, यह तो मुझपर कृपा करते हुए मुझे बड़ाई दिया है। तो भी हे देवी मैं अपनी वाणी सफल होने के लिए तुम्हे आशीर्वाद दूंगी।

 

 

 

103- दोहा का अर्थ-

 

 

 

तुम अपने प्राणनाथ और देवर के साथ सकुशल पूर्वक अयोध्या लौटोगी। तुम्हारी सारी मनः कामना पूरी होगी और तुम्हारा सुंदर यश जगत भर में फैलेगा।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- मंगल देने वाले गंगा जी के वचन सुनकर देवनदी को अनुकूल देखकर सीता जी आनंदित हुई। तब प्रभु श्री राम जी ने निषाद राज से कहा कि – अब तुम घर जाओ। यह सुनते ही मुंह सूख गया और उसके हृदय में दाह उत्पन्न हो गया।

 

 

 

2- तब निषाद राज ने हाथ जोड़कर कहा – हे रघुकुल शिरोमणि! मेरी विनती सुनिए। मैं नाथ आपके साथ रहकर, रास्ता दिखाकर, चार दिन कुछ आपके चरणों की सेवा करके।

 

 

 

 

3- हे रघुराज! जिस वन में आप जाकर रहेंगे, वहां मैं सुंदर पर्ण कुटी (पत्तो को कुटिया) बना दूंगा। तब मुझे आप जैसी आज्ञा देंगे, मुझे रघुवीर आपकी दुहाई है, मैं वैसा ही करूँगा।

 

 

 

4- उसका स्वाभाविक प्रेम देखकर श्री राम जी ने उसे साथ ले लिया। इससे निषाद राज के हृदय में बहुत आनंद हुआ, फिर निषाद राज ने अपनी पहचान वालो को बुलाया और उनका संतोष करके तब उनको विदा किया।

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Vishnu Puran Pdf in Hindi आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Vishnu Puran Pdf in Hindi की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

Leave a Comment